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Home›News›राफेल फाइटर जेट्स ने भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का अभ्यास करना शुरू

राफेल फाइटर जेट्स ने भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का अभ्यास करना शुरू

By Antim Pravakta
August 11, 2020
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नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। फ्रांस से हाल ही में मिले राफेल फाइटर जेट्स ने भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का अभ्यास करना शुरू कर दिया है। इससे भारतीय वायुसेना के पायलटों की भी पहाड़ी इलाकों में राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग हो रही है। वायुसेना के पायलट राफेल के साथ यह अभ्यास रात के समय हिमाचल की पहाड़ियों में कर रहे हैं। करीब 1700 किलोमीटर के घेरे में अटैक करने की क्षमता रखने वाले राफेल अपने सर्कल में कहीं भी मार कर सकते हैं। इस सर्कल में पूर्वी लद्दाख, चीन के अवैध कब्जे वाला अक्साई चिन, तिब्बत, पाकिस्तान और पीओके है। भारत सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल फाइटर जेट खरीदने का अनुबंध किया है। लम्बे इन्तजार के बाद फ्रांस से पांच राफेल विमान 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पहुंचे थे। आम तौर पर किसी भी नए लड़ाकू विमानों को आपूर्ति होने के तुरंत बाद मोर्चे पर तैनात नहीं किया जाता है क्योंकि उनका परीक्षण करने और रणनीति विकसित करने में समय लगता है लेकिन राफेल को जल्द ही हथियारों और सिस्टम की इस प्रक्रिया से गुजारकर पूर्वी लद्दाख की सीमा एलएसी पर चीन का मुकाबला करने के लिए तैनात किये जाने की योजना पहले से थी। इसी के मद्देनजर पहली खेप में मिले पांच राफेल लड़ाकू विमानों ने भारत आने के 10 दिन बाद ही यहां के पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का अभ्यास करना शुरू कर दिया है। चूंकि इन राफेल लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के पायलेट्स को फ्रांस में ट्रेनिंग दी गई है, इसलिए वे पहाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित युद्ध की तैयारी के लिहाज से हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में राफेल जेट के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। ताकि जरूरत पड़ने पर लद्दाख सेक्टर की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पायलट राफेल के साथ किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहे सकें। वायुसेना के सूत्रों का कहना है कि दरअसल चीन ने अपने कब्जे वाले अक्साई चिन में रडार लगा रखे हैं, जिनकी फ्रीक्वेंसी से दूर रखने के मकसद से राफेल फाइटर जेट्स को अभी एलएसी की बजाय हिमाचल के पहाड़ी इलाके में अभ्यास कराया जा रहा है। हालांकि राफेल में जैमर लगे हुए हैं जो दुश्मन के रडार को जाम करने की क्षमता रखते हैं। राफेल में एक टारगेट कॉर्डिनेटर डिवाइस लगा होता है जो राफेल को चील की नजर देता है। दुश्मन के इलाके में जाने से पहले ही टारगेट इसकी नजर में होते हैं। यही वजह है कि बॉर्डर क्रॉस करने से पहले ही पायलट टारगेट को हमले के लिए लॉक कर सकता है। राफेल लद्दाख जैसे दुर्गम इलाके में भी बेहद फायदेमंद है क्योंकि इसे पहाड़ में लड़ने के लिए डिजाइन किया गया है और तेजी से रास्ते बदल सकता है। पलक झपकते ही ऊंचाई तक पहुंच सकता है और इतनी ही तेजी से गोते भी लगा सकता है। राफेल के अटैक का दायरा करीब 1700 किलोमीटर के घेरे में होता है। भारतीय वायुसेना की ‘गोल्डन ऐरोज’ 17 स्क्वाड्रन अंबाला में ही है जहां से लद्दाख की दूरी करीब 430 किलोमीटर है लेकिन सुपरसॉनिक विमान के लिए यह बहुत कम दूरी है। राफेल रनवे पर शॉर्ट टेकऑफ कर सकता है, इसलिए इसे रनवे पर दौड़ने की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं होती है। एक बार आसमान में पहुंचने के बाद इस पर नजर रखना मुश्किल होता है, इसीलिए ये दुश्मन के राडार को पलक झपकते ही चकमा दे सकता है। यही वजह है कि ये लद्दाख के पहाड़ों में लड़ने के लिए ये बेहद कारगर है। राफेल हैमर मिसाइल, स्क्लैप मिसाइल, माइका और मेट्योर मिसाइल से लैस है। स्क्लैप मिसाइल और हैमर मिसाइल गाइडेड मिसाइल हैं जो हवा से जमीन पर हमला करती हैं। स्क्लैप मिसाइल 500 किलोमीटर तक मार कर सकती है तो हैमर मिसाइल 60 से 70 किलोमीटर तक दुश्मन को निशाना बना सकती है। मेट्योर और माइका मिसाइलों की स्पीड करीब 5000 किलोमीटर प्रतिघंटा है और ये 80 से 150 किलोमीटर तक हवा से हवा में मार कर सकती हैं। मेटयॉर मिसाइल से विजुअल रेंज के बाहर होने पर भी दुश्मन के लड़ाकू विमान को गिराया जा सकता है। इसके साथ ही राफेल जमीन पर अचानक हमला करने की भी ताकत रखता है।
दूसरों के बल पर आत्मविश्वास नहीं बढाया जा सकताः राजनाथ

नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को आत्मविश्वास बढाने का विजन बताते हुए आज कहा कि दूसरों के बल पर निर्भर रहकर कभी भी आत्मविश्वास नहीं बढाया जा सकता। श्री सिंह ने यहां रक्षा उत्पादन विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों और आयुध निर्माणियों द्वारा मिलकर शुरू किये जा रहे आत्मनिर्भर सप्ताह के उद्घाटन के मौके पर कहा कि इन गतिविधियों से रक्षा उत्पादन को बढावा मिलेगा। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का विजन इस महामारी के कठिन समय में, न केवल आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि उससे कहीं अधिक हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने का विजन है। दूसरों के बल पर निर्भर रहकर कभी भी अपना आत्मविश्वास नहीं बनाया जा सकता है। उसके लिए स्वयं का आत्मनिर्भर होना ही एकमात्र रास्ता है।’ उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने इसके लिए पांच सूत्रों पर आधारित इच्छा, समावेश, निवेश, ढांचागत सुविधा और नवाचार का रास्ता सुझाया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना केवल रक्षा ही नहीं, बल्कि नागरिक समाज के लिए भी बहुत फायदेमंद हो सकता है। उन्होंने कहा यदि हम अपने सभी साजो-सामान देश में ही निर्मित करने में सक्षम होते हैं, तो पूँजी का एक बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं जिसका उपयोग रक्षा उद्योग से जुड़ी लगभग 7,000 लघु इकाईयों को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

दूसरों के बल पर आत्मविश्वास नहीं बढाया जा सकताः राजनाथ

नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को आत्मविश्वास बढाने का विजन बताते हुए आज कहा कि दूसरों के बल पर निर्भर रहकर कभी भी आत्मविश्वास नहीं बढाया जा सकता। श्री सिंह ने यहां रक्षा उत्पादन विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों और आयुध निर्माणियों द्वारा मिलकर शुरू किये जा रहे आत्मनिर्भर सप्ताह के उद्घाटन के मौके पर कहा कि इन गतिविधियों से रक्षा उत्पादन को बढावा मिलेगा। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का विजन इस महामारी के कठिन समय में, न केवल आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि उससे कहीं अधिक हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने का विजन है। दूसरों के बल पर निर्भर रहकर कभी भी अपना आत्मविश्वास नहीं बनाया जा सकता है। उसके लिए स्वयं का आत्मनिर्भर होना ही एकमात्र रास्ता है।’ उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने इसके लिए पांच सूत्रों पर आधारित इच्छा, समावेश, निवेश, ढांचागत सुविधा और नवाचार का रास्ता सुझाया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना केवल रक्षा ही नहीं, बल्कि नागरिक समाज के लिए भी बहुत फायदेमंद हो सकता है। उन्होंने कहा यदि हम अपने सभी साजो-सामान देश में ही निर्मित करने में सक्षम होते हैं, तो पूँजी का एक बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं जिसका उपयोग रक्षा उद्योग से जुड़ी लगभग 7,000 लघु इकाईयों को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।
हिंदी राजनीति के चलते दक्षिण के नेताओं को नहीं मिलते हैं मौके : कुमारस्वामी का दावा

बेंगलुरु, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। जनता दल सेकुलर (जदएस) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने दक्षिण के नेताओं को ‘हिंदी राजनीति और भेदभाव’ के चलते मौका नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि इन बातों ने कई दक्षिण भारतीयों को प्रधानमंत्री बनने से रोका है। हिंदी नहीं जानने के कारण द्रमुक सांसद कनिमोई से सीआईएसएफ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से ‘ क्या आप भारतीय हैं’ जैसा सवाल करने पर क्षोभ प्रकट करते हुए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ वर्ग पर दक्षिण का ‘तिरस्कार करने’ और उसकी ‘अनदेखी’ करने का आरोप लगाया। अपने ट्वीटों में उन्होंने कन्नड़ों को कई सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों की नौकरियों में मौकों से कथित रूप से वंचित रखने को लेकर भी चिंता प्रकट की और कहा कि व्यक्ति को या तो अंग्रेजी में या हिंदी परीक्षा देनी पड़ती है। कुमारस्वामी ने लिखा, ‘‘द्रमुक सांसद कनिमोई से सवाल किया गया ‘ क्या आप भारतीय हैं?’ मैं बहन कनिमोई का किये गये अपमान पर अपनी आवाज उठाता हूं।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘अब यह बहस करना बिल्कुल उपयुक्त है कि कैसे दक्षिण के नेताओं से हिंदी-राजनीति और भेदभाव के चलते मौके छीन लिए गये।’’ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसद कनिमोई ने रविवार को आरोप लगाया था कि चेन्नई हवाईअड्डे पर जब वह हिंदी में नहीं बोल सकी, तब सीआईएसएफ की एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि ‘‘क्या वह भारतीय हैं।’’ इस पर, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने मामले की जांच का आदेश दिया। कुमारस्वामी ने कहा कि हिंदी की राजनीति ने कई दक्षिण भारतीयों को प्रधानमंत्री बनने से रोका है और एच डी देवेगौड़ा, करूणानिधि एवं कामराज उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा कि वैसे तो उनके पिता (देवेगौड़ा) इस बाधा को तोड़ने में सफल रहे लेकिन भाषा के कारण उनकी आलोचना किये जाने और उनकी उपहास उड़ाये जाने की कई घटनाएं सामने आयीं। कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘हिंदी राजनीति तब प्रधानमंत्री देवेगौड़ा को लाल किले से अपना स्वतंत्रता दिवस भाषण हिंदी में दिलाने में सफल रही थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री देवगौड़ा बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों के कारण ही अंततः राजी हुए। इस हद तक इस देश में हिंदी राजनीति काम करती है।’’ उन्होंने कहा कि उनका भी ऐसा ही अनुभव रहा है क्योंकि वह दो बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सत्तारूढ़ वर्ग दक्षिण को तुच्छ मानकर उसकी अनदेखी करता है। मैंने बहुत नजदीक से देखा है कि कैसे हिंदी भाषी नेता पैंतरेबाजी करते हैं। उनमें से ज्यादातर गैर हिंदी नेताओं का सम्मान नहीं करते।’’
कनिमोई से सीआईएसएएफ कर्मी के सवाल पर स्टालिन ने पूछा- ‘‘यह इंडिया है या हिंदिया है’’

चेन्नई, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने अपनी बहन और पार्टी की सांसद कनिमोई से जुड़ी एक घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए सोमवार को पूछा कि क्या भारतीय होने के लिए हिंदी जानना ही एक ‘मापदंड’ है। हिंदी नहीं बोल पाने पर सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने कनिमोई से पूछा था कि ‘‘क्या वह भारतीय हैं।’’ द्रमुक प्रमुख स्टालिन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘भारतीय होने के लिए क्या हिंदी ही मापदंड है। यह इंडिया है या हिंदिया है।’’ कनिमोई ने आरोप लगाया था कि हिंदी नहीं बोल पाने पर चेन्नई हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि क्या वह भारतीय हैं। द्रमुक दशकों से हिंदी ‘‘थोपे’’ जाने का विरोध करती रही है। स्टालिन ने ट्वीट में कहा कि बहुलवाद को खत्म करने की कोशिश करने वाले खत्म हो जाएंगे। कनिमोई ने रविवार को ट्वीट किया, ‘‘मैं हिंदी नहीं जानती इसलिए तमिल या अंग्रेजी में बोलने के लिए कहने पर आज हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं भारतीय हूं।’’ घटना के बाद अर्द्धसैन्य बल ने जांच का आदेश दिया। बल ने कहा ‘‘सीआईएसएफ की नीति किसी खास भाषा पर जोर देने की नहीं है।’’
हिंदी राजनीति के चलते दक्षिण के नेताओं को नहीं मिलते हैं मौके : कुमारस्वामी का दावा

बेंगलुरु, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। जनता दल सेकुलर (जदएस) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने दक्षिण के नेताओं को ‘हिंदी राजनीति और भेदभाव’ के चलते मौका नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि इन बातों ने कई दक्षिण भारतीयों को प्रधानमंत्री बनने से रोका है। हिंदी नहीं जानने के कारण द्रमुक सांसद कनिमोई से सीआईएसएफ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से ‘ क्या आप भारतीय हैं’ जैसा सवाल करने पर क्षोभ प्रकट करते हुए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने सत्तारूढ़ वर्ग पर दक्षिण का ‘तिरस्कार करने’ और उसकी ‘अनदेखी’ करने का आरोप लगाया। अपने ट्वीटों में उन्होंने कन्नड़ों को कई सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों की नौकरियों में मौकों से कथित रूप से वंचित रखने को लेकर भी चिंता प्रकट की और कहा कि व्यक्ति को या तो अंग्रेजी में या हिंदी परीक्षा देनी पड़ती है। कुमारस्वामी ने लिखा, ‘‘द्रमुक सांसद कनिमोई से सवाल किया गया ‘ क्या आप भारतीय हैं?’ मैं बहन कनिमोई का किये गये अपमान पर अपनी आवाज उठाता हूं।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘अब यह बहस करना बिल्कुल उपयुक्त है कि कैसे दक्षिण के नेताओं से हिंदी-राजनीति और भेदभाव के चलते मौके छीन लिए गये।’’ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसद कनिमोई ने रविवार को आरोप लगाया था कि चेन्नई हवाईअड्डे पर जब वह हिंदी में नहीं बोल सकी, तब सीआईएसएफ की एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि ‘‘क्या वह भारतीय हैं।’’ इस पर, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने मामले की जांच का आदेश दिया। कुमारस्वामी ने कहा कि हिंदी की राजनीति ने कई दक्षिण भारतीयों को प्रधानमंत्री बनने से रोका है और एच डी देवेगौड़ा, करूणानिधि एवं कामराज उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा कि वैसे तो उनके पिता (देवेगौड़ा) इस बाधा को तोड़ने में सफल रहे लेकिन भाषा के कारण उनकी आलोचना किये जाने और उनकी उपहास उड़ाये जाने की कई घटनाएं सामने आयीं। कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘हिंदी राजनीति तब प्रधानमंत्री देवेगौड़ा को लाल किले से अपना स्वतंत्रता दिवस भाषण हिंदी में दिलाने में सफल रही थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री देवगौड़ा बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों के कारण ही अंततः राजी हुए। इस हद तक इस देश में हिंदी राजनीति काम करती है।’’ उन्होंने कहा कि उनका भी ऐसा ही अनुभव रहा है क्योंकि वह दो बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सत्तारूढ़ वर्ग दक्षिण को तुच्छ मानकर उसकी अनदेखी करता है। मैंने बहुत नजदीक से देखा है कि कैसे हिंदी भाषी नेता पैंतरेबाजी करते हैं। उनमें से ज्यादातर गैर हिंदी नेताओं का सम्मान नहीं करते।’’
कनिमोई से सीआईएसएएफ कर्मी के सवाल पर स्टालिन ने पूछा- ‘‘यह इंडिया है या हिंदिया है’’

चेन्नई, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने अपनी बहन और पार्टी की सांसद कनिमोई से जुड़ी एक घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए सोमवार को पूछा कि क्या भारतीय होने के लिए हिंदी जानना ही एक ‘मापदंड’ है। हिंदी नहीं बोल पाने पर सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने कनिमोई से पूछा था कि ‘‘क्या वह भारतीय हैं।’’ द्रमुक प्रमुख स्टालिन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘भारतीय होने के लिए क्या हिंदी ही मापदंड है। यह इंडिया है या हिंदिया है।’’ कनिमोई ने आरोप लगाया था कि हिंदी नहीं बोल पाने पर चेन्नई हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि क्या वह भारतीय हैं। द्रमुक दशकों से हिंदी ‘‘थोपे’’ जाने का विरोध करती रही है। स्टालिन ने ट्वीट में कहा कि बहुलवाद को खत्म करने की कोशिश करने वाले खत्म हो जाएंगे। कनिमोई ने रविवार को ट्वीट किया, ‘‘मैं हिंदी नहीं जानती इसलिए तमिल या अंग्रेजी में बोलने के लिए कहने पर आज हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ के एक अधिकारी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं भारतीय हूं।’’ घटना के बाद अर्द्धसैन्य बल ने जांच का आदेश दिया। बल ने कहा ‘‘सीआईएसएफ की नीति किसी खास भाषा पर जोर देने की नहीं है।’’

विमान हादसे पर कांग्रेस सांसदों के ट्वीट पर पुरी ने सवाल उठाया

नई दिल्ली, 10 अगस्त (वेबवार्ता)। नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कोझिकोड विमान हादसे पर कांग्रेस सांसदों के अनेक ट्वीट पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए सोमवार को कहा कि कोझिकोड हवाईअड्डे पर अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के दिशानिर्देशानुसार रनवे और सुरक्षित क्षेत्र हैं। पुरी ने कहा, ‘‘कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने तथ्यों को पूरी तरह जाने बिना उत्साह में आकर ट्वीट किया।’’ उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘‘सांसद रवनीत बिट्टू को एक नैरो बॉडी विमान और एक वाइड बॉडी विमान के बीच अंतर नहीं पता, फिर भी उन्होंने इस विषय के विशेषज्ञ की तरह ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट को हटाकर अच्छा किया।’’ लुधियाना से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने आठ अगस्त को ट्विटर पर आरोप लगाया था, ‘‘कोझिकोड हवाईअड्डे पर वाइड बॉडी विमान के उतरने पर 2015 में लगी रोक और अनेक चेतावनियों के बावजूद हरदीप सिंह पुरी ने जुलाई 2019 में पाबंदी हटा दी और उसके नतीजतन ऐसा जानलेवा हादसा हुआ और लोगों की जान गयी।’’ शुक्रवार रात को कोझिकोड में एअर इंडिया एक्सप्रेस के जिस विमान की दुर्घटना हुई थी वह नैरो बॉडी विमान था। पुरी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि मेरे दोस्त शशि थरूर ने तथ्यों की पड़ताल की और कल अपना सुर बदल लिया। लेकिन सांसद मणिकम टैगोर अपनी हैरान करने वाली जागरुकता की कमी पर कायम हैं। वह चाहते थे कि मैं कोझिकोड जाऊं, जबकि मैं पहले ही रास्ते में था।’’

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