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Home›News›नए भारत के निर्माण के लिए पूरे देश का संतुलित विकास आवश्यक : मोदी

नए भारत के निर्माण के लिए पूरे देश का संतुलित विकास आवश्यक : मोदी

By Antim Pravakta
August 10, 2020
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अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए पूरे देश का संतुलित विकास आवश्यक है और इसी को ध्यान में रखकर उनकी सरकार काम कर रही है।अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के भाजपा कार्यकर्ताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि यह द्वीप समूह आत्मनिर्भर भारत और नये भारत के विकास और उसकी सुरक्षा में प्रमुख भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘नए भारत के निर्माण के लिए पूरे देश का संतुलित विकास आवश्यक है। हमने सुनिश्चित किया है कि सरकार भले ही एक जगह से काम करती हो लेकिन उसके कार्यों का लाभ देश के कोने-कोने तक पहुंचना चाहिए।’’उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यक्रमों का लाभ समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति ही नहीं बल्कि देश के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति को भी मिलना चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ हम गरीबों के घर, शौचालय, रसोई गैस, पीने का पानी, बिजली, मोबाइल, इंटनरनेट, सड़क, रेल कनेक्टिविटी जैसी बहुत ही मूल जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ मेगा और आधुनिक परियोजनाओं पर भी तेजी से काम कर रहे हैं।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस अंडमान निकोबार द्वीप समुह ने भारत की आजादी के आंदोलन को ताकत दी उसकी आत्मनिर्भर भारत के लिए, नए भारत की रक्षा-सुरक्षा और समृद्धि के लिए भी व्यापक भूमिका है।उन्होंने कहा, ‘‘इसी को समझते हुए 2017 में ही द्वीप समूह विकास एजेंसी का गठन किया गया था।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर के बीच समुद्र के भीतर बिछाये गई केबल संपर्क सुविधा (ओएफसी) से अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में मोबाइल और लैंडलाइन दूरसंचार सेवाएं बेहतर होंगी। उन्होंने कहा, ‘‘इंटरनेट कनेक्टिविटी में बहुत बड़ा सुधार हो जाएगा। नेटवर्क की समस्या की चर्चा बार-बार आती है उसका भी समाधान होगा। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई-लिखाई सुविधा का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलना संभव हो पाएगा। पर्यटन और दूसरे कारोबार से जुड़े साथियों को भी देश और दुनिया से जुड़ने में अब कोई समस्या नहीं आएगी।’’उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये दिल्ली से इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे।समुद्र के भीतर बिछा यह केबल पोर्ट ब्लेयर, स्वराज दीप (हैवलॉक), लिटिल अंडमान, कार निकोबार, कामोरता, ग्रेट निकोबार, लांग आईलैंड और रंगट को भी जोड़ेगा।

नायडू ने मजबूत, एकीकृत राष्ट्र निर्माण के लिए एक अभियान का किया आह्वान

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने एक मजबूत और भावनात्मक रूप से एकीकृत राष्ट्र बनाने के लिए एक अभियान चलाने का रविवार को आह्वान किया। नायडू ने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ पर एक फेसबुक पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने 1000-1947 के दौरान श्रृंखलाबद्ध विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक शोषण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश ने दूसरी सहस्राब्दी के दौरान, सांस्कृतिक दमन और आर्थिक शोषण के रूप में बहुत भारी कीमत चुकायी, जिसने समृद्ध भारत को कमजोर किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1947 में मिली आजादी सिर्फ 200 साल के औपनिवेशिक शासन को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि 1000 साल के ‘‘अंधकारमय युग’’ को समाप्त करने के लिए भी थी, जिस दौरान आक्रमणकारियों, व्यापारियों और उपनिवेशवादियों द्वारा देश को लूटा गया था जिन्होंने भारतीयों में एकता की कमी का फायदा उठाया। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे से संबंधित होने और एकता की कमी के कारण भारत को लंबे समय तक अधीनता और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। नायडू ने कहा कि इससे सीख लेते हुए, सभी भारतीयों को अपने संबंधित सांस्कृतिक मूल्यों और लोकाचार का पालन करते हुए भारतीयता की साझा भावना से बंधने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, एकीकृत और भावनात्मक रूप से एकजुट भारत उन लोगों से सबसे अच्छा बचाव है, जो संदिग्ध इरादों से हम पर बुरी नजर डालते हैं। नायडू ने सभी के लिए समानता और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करके भारत को एकता के धागे में पिरोने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि एक विभाजित और अधूरा समाज सभी भारतीयों का उनकी क्षमता के अनुसार संपूर्ण विकास संभव नहीं कर सकता। नायडू ने विदेशी आक्रमणों के प्रतिकूल प्रभावों के विस्तार में जाते हुए कहा कि इसके कारण वर्ष 1000 के बाद से देश की संपत्ति लूटी गई। उन्होंने सोमनाथ मंदिर तोड़े जाने और लंबे समय बाद स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत उसके पुनर्निर्माण और अयोध्या में करीब 500 वर्षों बाद राम मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू होने उल्लेख किया। 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने के जश्न का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोगों से गरीबी, अशिक्षा, असमानता, लैंगिक भेदभाव, भ्रष्टाचार और सभी प्रकार की सामाजिक बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

जीईएम पोर्टल के साथ एकीकरण के लिये रेलवे प्रतिबद्ध : गोयल

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि भारतीय रेलवे अपने सभी खरीद के लिये सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल के साथ एकीकृत होने को प्रतिबद्ध है। गोयल ने जीईएम-सीआईआई राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद संगोष्ठी 2020 में कहा, ‘‘मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय रेलवे और जीईएम पोर्टल एकीकरण के लिये दिन-रात काम कर रहे हैं, ताकि रेलवे की 70 हजार करोड़ रुपये की पूरी खरीद को सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर लाया जा सके।’’ जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तल्लीन कुमार ने इसी कार्यक्रम में बताया कि अगले कुछ महीनों में पोर्टल का उन्नत संस्करण पेश कर दिया जायेगा, जिससे सारी सरकारी खरीद का एक मंच पर एकीकरण किया जा सकेगा। गोयल ने बताया कि रेलवे अपने परिचालन के लिये 70-75 हजार करोड़ रुपये के वस्तुओं की प्रत्यक्ष खरीद करता है। उन्होंने कहा कि अब इस पूरी खरीद को सरकारी पोर्टल पर लाने का काम चल रहा है। गोयल ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि इससे रेलवे को कम से कम 10-15 प्रतिशत की बचत होगी और यह 10,000 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।’ गोयल ने कहा कि रेलवे अपने माल और सेवाओं का 98 प्रतिशत से अधिक भारत में खरीदता है और अगले 8-12 महीने में इस खरीद को जीईएम प्लेटफॉर्म पर ले जाने से खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निर्बाध, कुशल और तेज बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे ने खुद को पूरी तरह से जीईएम पोर्टल के साथ एकीकृत करने और सभी खरीद को वहां (जीईएम) पर स्थानांतरित करने के लिये प्रतिबद्ध किया है … कल्पना कीजिए कि हम इससे खरीद के समय में हजारों घंटे की बचत करेंगे।’’ कुमार ने कहा कि जीईएम पोर्टल का नया उन्नत संस्करण सभी सरकारी खरीद को एक ही मंच पर एकीकृत करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अगले कुछ महीने में जीईएम 4.0 की शुरुआत कर दी जायेगी, जो एकीकृत खरीद प्रणाली सुनिश्चित करेगा।’’ उन्होंने कहा कि अन्य पोर्टल्स जैसे कि केंद्रीय सार्वजनिक ख्खरीद पोर्टल, भारतीय रेलवे इलेक्ट्रॉनिक खरीद प्रणाली और रक्षा सार्वजनिक खरीद पोर्टल आदि को चरणबद्ध तरीके से जीईएम के साथ एकीकृत किया जायेगा। उन्होंने कहा, ‘‘जीईएम 4.0 का उद्देश्य एकीकृत प्रणाली की पेशकश करना है, जो स्मार्ट, बेहतर, अधिक बुद्धिमान और समावेशी है। इसमें विभिन्न खरीदारों के लिये कई विशेषताओं और कार्यक्षमता के साथ महत्वपूर्ण संवर्द्धन और सुधार होंगे।’’
सरकार जल्द ही ऋण गारंटी संवर्धन निगम के प्रस्ताव पर करेगी विचार

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्त पोषण के पूंजी स्रोतों को व्यापक बनाने के लिए ऋण गारंटी संवर्धन निगम के गठन के प्रस्ताव पर विचार करेगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) पर कार्यबल के अनुसार भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले पांच वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे में 111 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि वित्त पोषण की बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए ऋण गारंटी संवर्धन निगम बुनियादी ढांचे के लिए फंड जुटाने में मदद करेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में घोषणा की थी कि बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए पूंजी के स्रोतों को बढ़ाने के लिए ऋण गारंटी संवर्धन निगम की स्थापना की जाएगी। इसके लिए आरबीआई पहले ही ऋण गारंटी संवर्धन निगम के लिए नियमन को अधिसूचित कर चुका है। सूत्रों ने कहा कि आईआईएफसीएल, एलआईसी, पीएफसी, आरईसी और इसी तरह की अन्य कंपनियों की साझेदारी में निगम को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में गठित किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित निगम की स्थापना के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निगम के पास 20,000 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी हो सकती है और पूरी हो चुकी परियोजनाओं द्वारा जारी बांडों को गारंटी देगा। ऋण संवर्धन से कंपनियों को अपनी बांड रेटिंग बेहतर बनाने में मदद मिलती है और उन्हें सस्ती ब्याज दरों पर ऋण मिलने की गुंजाइश बढ़ जाती है। सार्वजनिक क्षेत्र की एक वित्तीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बुनियादी ढांचे के लिए दीर्घावधि के वित्त पोषण की उपलब्धता एक चुनौती है। वित्त मंत्री ने 111 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन के लिए वित्त पोषण का समर्थन करते हुए इस साल बजट में लगभग 22,000 करोड़ रुपये दिए थे।

देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जायेंगे रक्षा सुधार, स्वदेशी उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा : उद्योग जगत

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 09 अगस्त । भारतीय उद्योग जगत ने 101 प्रकार के हथियार व रक्षा प्रणालियों/मंचों के आयात पर रोक लगाने तथा रक्षा-उत्पादन क्षेत्र में अन्य सुधारों के केंद्र सरकार के निर्णय की रविवार को सराहना की। उद्योग जगत ने इन्हें देश को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ‘लीक से हट कर’ एक बड़ा कदम करार दिया और कहा कि इससे स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में तेजी आयेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घरेलू रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिये सुधारों की एक बड़ी पहल करते हुए तोपखाने के लिए तोप, असॉल्ट राइफल और मालवाहक विमानों समेत 101 रक्षा हथियारों व उपकरणों के आयात पर रोक लगाने की घोषणा की। सिंह ने ट्वीट किया, ‘‘रक्षा मंत्रालय आत्मनिर्भर भारत पहल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिये अब तैयार है।’’ उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने 101 प्रकार के सामानों की सूची तैयार की है, जिनके आयात को रोकने के लिये 2020 से 2024 के दौरान चरणबद्ध तरीके से काम किया जायेगा। उन्होंने घरेलू रक्षा खरीद और बाहरी रक्षा खरीद के लिये बजट के विभाजन की भी घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने चालू वित्त वर्ष में घरेलू रक्षा खरीद के लिये 52 हजार करोड़ रुपये के अलग बजट की भी घोषणा की। भारततय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इन सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि रक्षा प्रणालियों व उपकरणों के आयात को रोकने के लिये रक्षा मंत्री के द्वारा घोषित सूची आत्मनिर्भर भारत के लिये नये मार्ग का सृजन करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए 52 हजार करोड़ रुपये की घोषणा के साथ ही आयात रोक के लिये 101 वस्तुओं की सूची से आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिला है।’’ सीआईआई ने कहा, ‘आज का दिन रक्षा और एयरोस्पेस में भारतीय उद्योग के लिये एक ऐतिहासिक दिन है। रक्षा मंत्री को हम यह आश्वासन दे सकते हैं कि इससे भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस उद्योग ऊपर उठेगा और चुनौती को पूरा करेगा।’’ फिक्की की रक्षा समिति के अध्यक्ष एसपी शुक्ला ने कहा कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ी छलांग है। शुक्ला ने ट्वीट किया, ‘‘फिक्की आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिये 101 प्रकार के साजो सामान की सूची की घोषणा की सराहना करता है। यह रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भ भारत के लिये एक बड़ी छलांग है।’’ उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘घरेलू पूंजीगत खरीद के लिये 52 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान एक शानदार कदम है। यह रक्षा खरीद के ममाले में एक लम्बी अवधि की राह स्पष्ट किए जाने के फिक्की की रक्षा समिति के अनुरोध को पूरा करता है। उद्योग अब अपने पूंजीगत व्यय और उत्पादन क्षमता की योजना बना सकता है।’’ एसोचौम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि भारत सशस्त्र बलों के लिये हथियारों, गोला बारूद और उच्च प्रौद्योगिकी प्रणालियों के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता सबसे वांछित नीतिगत पहल है। उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा उत्पादन में क्षमता वृद्धि न सिर्फ घरेलू उद्योग के लिये एक महान आर्थिक अवसर प्रदान करती है, बल्कि तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति में देश को एक बड़ा रणनीतिक लाभ देती है।’’

ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी के जरिये डेढ़ लाख से अधिक टेली-परामर्श दिये गये

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । बिना अस्पताल गये मरीजों को घर बैठे चिकित्सीय परामर्श देने के लिए नवंबर 2019 में शुरू की गयी राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी के जरिये अब तक डेढ़ लाख से अधिक 1,58,000 टेली परामर्श दिये गये हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अगुवाई में ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी प्लेटफॉर्म को लेकर राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समीक्षा बैठक की गयी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी विजय भास्कर ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, “टेली मेडिसिन स्वास्थ्य सेवाओं की एक उभरती हुयी विधा है, जिससे हम तेज गति से सुदूर क्षेत्रों में भी बेहतर चिकित्सकीय परामर्श को पहुंचा पा रहे हैं। छोटी से अवधि में ये सेवायें 23 राज्यों में शुरू हो गयी हैं और अन्य राज्य भी इसे लागू करने की प्रक्रिया में हैं।” उन्होंने टेली परामर्श के आंकड़े के डेढ़ लाख के पार होने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने आयुष्मान भारत हेल्थ एवं वेलनेस केंद्रों में ब्रॉडबैंड और मोबाइल फोन के जरिये डिजिटल भारत के सपने को साकार करने की कोशिश की। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग और डॉक्टरों तथा विशेषज्ञों की निस्वार्थ भावना से हम टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म के जरिये स्वास्थ्य सेवायें देने में सक्षम हुए हैं। इससे कोरोना महामारी के दौरान हमारे स्वास्थ्य संबंधी ढांचे को मजबूती मिली है।” श्री चौबे ने इस मौके पर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक परिवर्तनकारी कदम है क्योंकि वे शहरों में रहने वाले मेडिकल विशेषज्ञों से आसानी से संपर्क नहीं कर पाते थे।
सिंधु जल संधि बैठक : भारत का वीडियो कांफ्रेंस का सुझाव, पाक का अटारी सीमा पर मिलने पर जोर

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । भारत ने पाकिस्तान को ‘सिंधु जल संधि’ के तहत लंबित मुद्दों पर चर्चा कोरोना वायरस महामारी के चलते वीडियो कांफ्रेंस के जरिये करने का सुझाव दिया है, लेकिन इस्लामाबाद अटारी सीमा चौकी (चेक पोस्ट) पर बाचतीत करने पर जोर दे रहा है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। पिछले हफ्ते एक पत्र में भारत के सिंधु आयुक्त ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से कहा था कि महामारी के कारण अटारी संयुक्त चौकी पर बैठक करना उपयुक्त नहीं होगा। सिंधु जल संधि के तहत लंबित मुद्दे पर चर्चा के लिये पाकिस्तान के अनुरोध पर मार्च के अंतिम सप्ताह में एक बैठक का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। लेकिन महामारी फैलने के कारण इसे टाल दिया गया। सूत्रों ने बताया कि स्थिति के सामान्य होने में और अंतरराष्ट्रीय यात्रा बहाल होने में कुछ वक्त लग सकने पर गौर करते हुए भारतीय आयुक्त ने, जुलाई के प्रथम सप्ताह में, वीडियो कांफ्रेंस या किसी अन्य वैकल्पिक माध्यम से बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव दिया था। वहीं, इसके जवाब में पाकिस्तान के आयुक्त ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में लिखे अपने पत्र में पारंपरिक बैठक अटारी संयुक्त चौकी पर करने पर जोर दिया। एक सूत्र ने बताया, ‘‘भारतीय आयुक्त ने इसका यह कहते हुए जवाब दिया कि उसके (भारत के) शिष्टमंडल की यात्रा के लिये और अटारी संयुक्त चौकी पर बैठक करने के लिये भारत में स्थिति अब भी अनुकूल नहीं है तथा पाकिस्तान की इच्छा के मुताबिक अटारी संयुक्त चौकी पर इस तरह की बैठक की अनुमति देने में कुछ वक्त लग सकता है। ‘‘ सूत्रों ने बताया कि भारतीय आयुक्त ने पाकिस्तानी पक्ष से लंबित मुद्दों और नये मुद्दों पर एक व्यवहार्य विकल्प के तौर पर डिजिटल बैठक करने पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि यहां तक कि अन्य देशों के साथ राजनयिक वार्ता डिजिटल बैठकों के माध्यम से हो रही हैं और सिंधु बैठक इसी तरह से हो सकती है। अभी दोनों पक्षों के बीच एक लंबित मुद्दा किशनगंगा और रातले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर असहमति है। किशनगंगा परियेजना 2018 से ऑपरेशन में है जबकि रातले पर काम 2014 से रूका हुआ है क्योंकि जम्मू कश्मीर सरकार और ठेकेदार के बीच एक अनुबंध विवाद है। लंबी बातचीत के बाद भारत ने 2016 में इस मुद्दे के हल के लिये एक निष्पक्ष विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग की थी जबकि पाक ने मध्यस्थता अदालत नियुक्त किये जाने का अनुरोध किया था। आगे की राह तलाशने के लिये नवंबर 2019 में जल शक्ति मंत्रालय के सचिव के नेतृत्व में विश्व बैंक के साथ एक बैठक के बाद यह सहमति बनी थी कि संधि के प्रावधानों के मुताबिक दोनों आयुक्त इस विषय पर चर्चा करेंगे ताकि समाधान के माध्यम — मध्यस्थता अदालत या निष्पक्ष विशेषज्ञ–पर निर्णय हो सके। विश्व बैंक ने शुरूआत में दोनों माध्यमों पर आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन बाद में दिसंबर 2016 में इसने दोनों प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया ताकि दोनों पक्ष द्विपक्षीय तरीके से एक विकल्प चुन सकें। संधि के तहत विश्व बैंक की भूमिका सिर्फ कार्यप्रणालीगत है और इस बारे में इस वैश्विक वित्तीय संस्था के कोई स्वतंत्र फैसला लेने का कोई प्रावधान नहीं है। सूत्रों ने बताया कि विश्व बैंक की अस्थायी भूमिका अब भी जारी है। अगस्त एवं सितंबर 2017 में वाशिंगटन में विश्व बैंक कार्यालय में सचिव स्तर की दो त्रिपक्षीय बैठक हुई। नवंबर की वार्ता के बाद भारतीय आयुक्त ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को फरवरी 2020 में स्थायी सिंधु आयोग की बैठक करने के लिये आमंत्रित किया। यह बैठक मार्च में होने का कार्यक्रम था लेकिन महामारी के चलते इसे टाल दिया गया। सिंधु जल संधि के तहत गठित स्थायी सिंधु आयोग पर 1960 में दोनों देशों ने हस्ताक्षर किये थे। यह संधि दोनों आयुक्तों के हर साल कम से कम एक बार मिलने का प्रावधान करती है। यह बैठक दोनों देशों में क्रमवार रूप से होंगी। संधि के मुताबिक रावी, व्यास और सतलुज का जल विशेष रूप से भारत के लिये होगा जबकि सिंधु, चेनाब और झेलम नदियों के जल के उपयोग का अधिकार पाकिस्तान के पास होगा। उसे कृषि, नौवहन, घरेलू उपयोग और पनबिजली परियोजनाएं विकसित करने पर निर्बाध अधिकार दिये गये हैं।
युवा भारत की ताकत, इन्हें चाहिए रोजगार : प्रियंका गांधी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । आर्थिक मंदी और कोरोना की मार झेल रही अर्थव्यवस्था के कारण तेजी से बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरने में लगी है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि युवा वर्ग भारत की ताकत है और इस युवाओं को रोजगार की जरूरत है। प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा, ष्युवा शक्ति भारत की ताकत है। भाजपा सरकार की रोजगार नष्ट करने वाली नीतियों के ठीक विपरीत आज भारत के युवाओं के लिए रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर खड़े करने की आवश्यकता है। ‘रोजगार दो’ युवा भारत की माँग है। रोजगार युवा भारत की जरूरत है।ष् युवा कांग्रेस की मुहिम ‘रोजगार दो’ का समर्थन करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश ‘भाषण’ से नहीं रोजगार से चलेगा। देश झूठे वादों से नहीं युवाओं का भविष्य संवारने से ही बचेगा। जरूरत है कि रोजगार की ताकत के साथ युवाओं को सबल बनाया जाए, ना कि सिर्फ वादों का घोल पिलाया जाए। दरअसल कांग्रेस की युवा इकाई यूथ कांग्रेस ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया है। ‘रोजगार दो’ अभियान का जरिए यूथ कांग्रेस सोशल मीडिया से सड़क तक मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर दबाव बनाएगी। यूथ कांग्रेस की मांग है कि खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्तियां हों और निजी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए नीतियां बनें।

नगर निगम के स्कूलों में नयी शिक्षा नीति के प्रावधान लागू किए जाएंगे : दिल्ली भाजपा प्रमुख

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने रविवार को कहा कि पार्टी नगर निगम के स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा में नयी शिक्षा नीति से जुड़े प्रावधानों को लागू करने की योजना बना रही है। केंद्र में मोदी सरकार ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करने की घोषणा की है। एनईपी में कहा गया है कि कक्षा पांच तक के छात्रों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि शहर में निगम संचालित स्कूलों में एनईपी पर आधारित नए पाठ्यक्रम को लागू करने के संबंध में विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘वर्तमान शैक्षणिक सत्र में निगम के सभी स्कूलों में नयी शिक्षा नीति को लागू किया जाएगा।’’ पिछले सप्ताह गुप्ता ने भाजपा शासन वाले तीनों नगर निगमों के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा की थी और उन्हें अपने प्राथमिक स्कूलों में नयी शिक्षा नीति को लागू करने पर काम शुरू करने का निर्देश दिया था। दिल्ली में तीनों नगर निगम 1600 से ज्यादा प्राथमिक स्कूलों का संचालन करते हैं। इनमें कक्षा एक से पांच तक में सात लाख से ज्यादा बच्चे हैं। गुप्ता ने कहा कि एनईपी के मुताबिक पाठ्यक्रम तैयार करने को लेकर शिक्षाविदों की सलाह भी ली जाएगी। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और दिल्ली इकाई के प्रभारी श्याम जाजू ने कहा कि नयी शिक्षा नीति को लेकर जागरूकता अभियान और विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही है।
इन हालातो में मैट्रो चले या नहीं, जनता बोली नहीं बाबा नहीं

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । कोरोना संक्रमण के दौरान हुए लोक डाउन से ही बंद पड़ी मेट्रो सेवा को फिर से शुरू करने पर सरकार मे मंथन चल रहा है। जिसमे केवल 50 फीसदी क्षमता के साथ यात्रा करने का प्रावधान बताया जा रहा है। 22 मार्च से बंद पड़ी मेट्रो को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को 1350 करोड़ रूपय से अधिक का नुकसान हो चुका है। लेकिन बीमारी के बीच दिल्ली मेट्रो के सभी कार्यलय, साइट और डिपो नियमित रूप से कार्य कर रहे है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली मेट्रो का पूरा नेटवर्क 389 किलोमीटर है जिसमे कि 285 मेट्रो स्टेशनो से होकर 300 मेट्रो रेल गुजरती है। आने वाले दिनो मे मेट्रो शुरू किये जाने के मुद्दे पर वीर अर्जुन नें ने लोगो से उनके विचार जाने।

आटो चालक मनोज कुमार का कहना है कि सरकार द्वारा मेट्रो सेवा दुबारा से वापस शुरू करने का फैसला कोई गलत नहीं है यदि मेट्रो सेवा शुरू होती है तो आटो व रिक्शा चालक की जिंदगी दोबारा पटरी पर वापस आने कि उम्मीद है। 4 महीने से जारी लोकडाउन ने सभी का रोजगार प्रभावित किया है। मेट्रो चालू होने से लोकल सवारियों का आना शुरू होगा। मेट्रो मे सफर करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति की स्कैनिंग हो ओर प्रशाशन के साथ साथ यात्री भी सावधानी बरते।

नन्द नगरी निवासी विमलेश का कहना है कि वेकसीन ना आने तक भारत पर है संकट कि घड़ी मंडरा रही है। जबकि सरकार बीमारी रोकने मे नाकाम साबित हो रही है। ऐसे मे मेट्रो शुरू होने से काफी समस्याएँ उत्पन्न होंगी। सरकार ने अपने मुनाफे के लिए एक तरफ तो शराब के ठेके तो काफी पहले ही खोल दिये है जबकि स्कूल, कॉलेज इत्यादि सब बंद है। अब मेट्रो को शुरू करने से सरकार सिर्फ मुनाफे कि तरफ ही देख रही है। अभी तो मेट्रो चालू करना सही नहीं। कोरोना के बढ़ते आकड़ों को देखते हुए मेट्रो न शुरू करे। सरकार पहले कोरोना पर काबू पाये फिर मेट्रो चलाये।

राम नगर निवासी अंबुज का मान ना है कि बातो पर गौर करे तो, बीमारी को देखते हुए मेट्रो सेवा शुरू करने का फैसला सरकार के लिये ‘खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा साबितहो सकता है। मेट्रो खोलने के निर्णय से कोरोना वाइरस के आंकड़ो मे बड़ा इजाफा होने कि संभावना होगी।

नत्थू कालोनी निवासी सन्नी शर्मा ने कहा कि मेट्रो खुलने से पब्लिक को सहूलियत तो होगी किन्तु खतरा भी उतना ही बढ़ेगा। पूरी तरह से पैक होने के कारण मेट्रो मे कोरोना का खतरा ज्यादा मंडराएगा और पहले कि तरह ही स्थिती खराब हो जाएगी। अस्पतालो मे मरीजो कि संख्या मे भारी इजाफा होना लाजमी है। इस मुश्किल समय मे मेट्रो को दोबारा पटरी पर लाने का यह फैसला सरकार पर भारी पड़ सकता है। अनलोक कि स्थिती दोबारा लोकडाउन मे बादल सकती है।

स्कूल ब्लॉक निवासी भूपेंद्र ने कहा कि हालात काबू मे ना होने तक दिल्ली मेट्रो को बंद रखना जरूरी। दिल्ली मे कोरोना के केसो मे बढ़ोतरी घटने का नाम नहीं ले रही ओर ऐसे मई सरकार मेट्रो चालू करना चाहती है। मेट्रो बंद से भी दिल्लीवासियो का रोज मर्रा का आवागमन जारी है। मेट्रो बंद से भी जिंदगी जियो कि त्यो है। आकड़ों को देख कर तो अभी और कुछ महीने मेट्रो सेवा बंद रखनी चाहिये।

सुन्दर नगरी निवासी नितिन का कहना है कि अभी मेट्रो खोलना होगा जल्दबाजी। पूरी तरह से एयर कंडीशनर होने कि वजह से एसी अंडर कि हवा को खींच वापस छोड़ता है जिस कारण कोरोना फैलना का खतरा ज्यादा होता है। अगर एक भी संक्रमित व्यक्ति मेट्रो मे सफर कर रहा है तो वो मेट्रो मे ना जाने कितने लोगो को वाइरस के चपेटे मे ले सकता है। इसपर ध्यान देते हुए तो मेट्रो वापसी का फैसला गलत होगा।

दिलशाद गार्डेन निवासी भूपेन्द्र का मानना है कि दिल्ली मेट्रो अभी शुरू करना बेशक सरकार के लिये लाभकारी हो परंतु लोगो के लिए घातक सिद्ध होगा चुकि सामाजिक दूरी के पालन से भी महत्वपूर्ण यह है कि किस तरह के यातायात कि सेवा लेनी पड़ रही है। मेट्रो दौबरा शुरू करने के बाद भी जल्दी से सफर करने मे भी लोग घबरा रहे है क्यूकी मेट्रो के कारण लोगो को संक्रमण होने का खतरा मंडरा रहा है।
राष्ट्रपति के निर्देश पर स्वतंत्रता सैनानियों को किया सम्मानित

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । राष्ट्रपति भवन में हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता सैनानियों को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते राष्ट्रपति के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया गया। भारत छोड़ो आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर रविवार को दक्षिणी-पश्चिमी जिले से एसडीएम हेडक्वार्टर अरुण कुमार, चीफ वार्डन सुभाष गुप्ता व जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के परियोजना अधिकारी विनोद भारद्वाज की टीम द्वारका सेक्टर-10 स्थित मंचत अपार्टमेंट निवासी नंद लाल गुप्ता (104) व जनकपुरी ए4सी-100 निवासी इंद्र राज आनंद (90) के घर पहुंची। यहां इन्होंने दोनों स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया। इस दौरान दोनों ही स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी से पूर्व और बाद के दौरान के समय से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर दोनों स्वतंत्रता सेनानियों का परिवार भी उपस्थित रहा। इसके अलावा दिल्ली कैंट एसडीएम इति अग्रवाल ने भी दिल्ली कैंट में अब्दुला डेयरी निवासी लाजपत राय यादव (100) को भी सम्मानित किया गया। इति अग्रवाल ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। साथ ही उन्हें समझाया कोरोना वायरस से बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा है, ऐसे में सतर्क रहें।

सरकारी संस्थानों के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 10 अगस्त । अगस्त क्रांति दिवस पर खजूरी चौक पर लोक समाज पार्टी ने सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों के निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अधिवक्ता गौरी शंकर शर्मा ने कहा कि यह प्रदर्शन देश की संपति रेलवे, हवाई जहाज, बिजली, सड़क, जल, जंगल, जमीन के निजीकरण व ठेकेदारी के खिलाफ किया गया। इस मौके पर आकाश मौर्या, हरी शंकर तिवारी, संजीव मदन, मदन सिंह बोरा, नरेश कुमार सेन, अब्दुल सलाम, सतवीर सिंह, चौधरी रमेश, राम भजन मिश्रा, सुरेश दुबे, अशोक मौर्या, नीरज दुबे आदि शामिल रहे।

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