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Home›News›संसद ने दी तीन श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी

संसद ने दी तीन श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी

By Antim Pravakta
September 25, 2020
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संसद ने दी तीन श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । संसद ने बुधवार को तीन प्रमुख श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी दे दी, जिनके तहत कंपनियों को बंद करने की बाधाएं खत्म होंगी और अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की इजाजत के बिना कर्मचारियों को निकालने की अनुमति होगी। राज्यसभा ने ध्वनि मत से औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा पर शेष तीन श्रम संहिताओं को पारित किया। इस दौरान आठ सांसदों के निष्कासन के विरोध में कांग्रेस, वामपंथी और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा की कार्रवाई का बहिष्कार किया। इन तीनों संहिताओं को लोकसभा ने मंगलवार को पारित किया था और अब इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने तीनों श्रम सुधार विधेयकों पर हुई बहस का जवाब देते हुए कहा, ‘‘श्रम सुधारों का मकसद बदले हुए कारोबारी माहौल के अनुकूल पारदर्शी प्रणाली तैयार करना है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि 16 राज्यों ने पहले ही अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना फर्म को बंद करने और छंटनी करने की इजाजत दे दी है। गंगवार ने कहा कि रोजगार सृजन के लिए यह उचित नहीं है कि इस सीमा को 100 कर्मचारियों तक बनाए रखा जाए, क्योंकि इससे नियोक्ता अधिक कर्मचारियों की भर्ती से कतराने लगते हैं और वे जानबूझकर अपने कर्मचारियों की संख्या को कम स्तर पर बनाए रखते हैं। उन्होंने सदन को बताया कि इस सीमा को बढ़ाने से रोजगार बढ़ेगा और नियोक्ताओं को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ये विधेयक कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेंगे और भविष्य निधि संगठन तथा कर्मचारी राज्य निगम के दायरे में विस्तार करके श्रमिकों को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। सरकार ने 29 से अधिक श्रम कानूनों को चार संहिताओं में मिला दिया था और उनमें से एक संहिता (मजदूरी संहिता विधेयक, 2019) पहले ही पारित हो चुकी है। राज्यसभा में बुधवार को पारित हुए विधेयक संहिताएं- ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्यदशा संहिता 2020’, ‘औद्योगिक संबंध संहिता 2020’ और ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020’ हैं। इनमें किसी प्रतिष्ठान में आजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा को विनियमित करने, औद्योगिक विवादों की जांच एवं निर्धारण तथा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान किये गए हैं।
संसद ने जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक को मंजूरी दी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । संसद ने 23 सितंबर को जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें पांच भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी और डोगरी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का प्रावधान है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि जम्मू कश्मीर के 74 प्रतिशत लोगों की भाषा कश्मीरी और डोगरी है किंतु इन भाषाओं को 70 साल तक राज्य की आधिकारिक भाषा नहीं बनाकर लोगों को उनकी आकांक्षाओं से वंचित रखा गया। बहरहाल, गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषा घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में लोग कश्मीरी, डोगरी और हिंदी बोलते हैं और समझते हैं। रेड्डी ने कहा ‘‘ 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में जितने लोग कश्मीरी बोलने वाले हैं, उनमें से 53.26 प्रतिशत जम्मू कश्मीर में हैं। लेकिन 70 साल तक कश्मीरी आधिकारिक भाषा नहीं थी। यह ऐतिहासिक भूल थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक गलतियों को सुधारा जा रहा है और हम यह भी करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में 2.3 प्रतिशत लोगों की भाषा हिंदी है।’’ उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भाषा, धर्म, जाति के आधार पर भेदभाव में विश्वास नहीं रखती। मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी । लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इससे पहले रेड्डी ने कहा कि 70 साल से उर्दू जम्मू कश्मीर की आधिकारिक भाषा है लेकिन जम्मू-कश्मीर में उर्दू भाषा बोलने वाले लोग 0.16 प्रतिशत ही हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू और अंग्रेजी दोनों को आधिकारिक भाषा के तौर पर जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि डोगरी वहां दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 1.78 प्रतिशत है। इसलिए इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार किसी भी क्षेत्रीय भाषा के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में बोले जानी वाली पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी के विकास के लिए विधेयक में कई प्रावधान किये गये हैं। उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए पीडीपी के मीर मोहम्मद फैज ने कहा कि इसमें पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी भाषा को भी शामिल किया जाए। भाजपा के एस एस नागर ने पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी को इस सूची में शामिल करने की मांग का समर्थन किया। शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि इस विधेयक में पंजाबी को शामिल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान में भी पंजाबी एक आधिकारिक भाषा थी। उन्होंने इस विधेयक में पंजाबी को शामिल करने की मांग की। भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास ने विधेयक में डोगरी भाषा को आधिकारिक भाषा बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया।
विपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला : मायावती

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मायावती ने संसद के मौजूदा सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे को अमर्यादित करार देते हुये इसे लोकतंत्र के लिये शर्मनाक बताया है।

मायावती ने ट्वीट किया वैसे तो संसद लोकतंत्र का मन्दिर ही कहलाता है फिर भी इसकी मर्यादा अनेकों बार तार-तार हुई है। वर्तमान संसद सत्र के दौरान भी सदन में सरकार की कार्यशैली व विपक्ष का जो व्यवहार देखने को मिला है वह संसद की मर्यादा, संविधान की गरिमा व लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है। अति-दुःखद।

गौरतलब है कि पिछले रविवार को राज्यसभा में किसान विधेयक पारित करने के दौरान विपक्षी सांसदों ने काफी शोर-शराबा और हंगामा किया था। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने रूल बुक तक फाड़ दी थी वहीं आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह ने उप सभापति के आसन के पास आकर सरकार विरोधी नारेबाजी की थी। बाद में सभापति एम वेंकैया नायडू ने आठ विपक्षी सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया था।
पालघर घटना संबंधी कार्यक्रम के खिलाफ शिकायत पर दो सप्ताह में करे फैसलाः अदालत ने केंद्र से कहा

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र से कहा कि वह 16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर की गई दो साधुओं समेत तीन लोगों की हत्या के मामले संबंधी कार्यक्रम प्रसारित करने को लेकर एक मीडिया हाउस के खिलाफ दायर शिकायत पर दो सप्ताह के अंदर कोई फैसला करे। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता की पांच मई की शिकायत पर विचार करे और दो सप्ताह के अंदर कोई फैसला करे। इस आदेश के साथ, अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। यह याचिका वकील अमरीश रंजन पांडे ने दायर की थी। पांडे ने आरोप लगाया है कि इस घटना के संबंध में प्रसारित किए गए कार्यक्रमों में ‘‘देश में साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने की कोशिश’’ की गई। याचिका में दावा किया गया है, ‘‘ये कार्यक्रम अस्वीकार्य थे। इनका मकसद हिंसा को प्रोत्साहित करना या भड़काना था।’’ याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इसी मीडिया हाउस के एक अन्य कार्यक्रम में मुंबई के बांद्रा में प्रवासियों की एक सभा को षड्यंत्र बताया गया था। उसने कहा कि इन घटनाओं पर शो/कार्यक्रम केबल टेलीविजन नियमन के नियमों और साथ ही मंत्रालय के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दिशानिर्देशों के घोर उल्लंघन थे। इन कथित उल्लंघनों के बावजूद मंत्रालय ने इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। याचिका में कहा गया है कि मंत्रालय ने मीडिया हाउस का लाइसेंस रद्द करने की मांग करने वाली पांडे की पांच मई की शिकायत पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय नेटिंग विधेयक को संसद की मंजूरी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । संसद ने बुधवार को योग्य वित्तीय अनुबंधों के द्विपक्षीय शुद्धिकरण के लिए कानूनी ढांचा मुहैया कराने वाले एक विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय नेटिंग विधेयक-2020 को बुधवार को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई। लोकसभा ने इस विधेयक को रविवार को पारित किया था। इस कानून के तहत योग्य वित्तीय अनुबंधों के शुद्धिकरण की अनुमति दी गई है। यहां शुद्धिकरण का आशय वित्तीय अनुबंधों के ऋण, निपटान और अन्य जोखिमों को कम करने से है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विधेयक को देश में वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह दो पक्षों के द्विपक्षीय शुद्धिकरण के लिए कानूनी आधार मुहैया करता है। उन्होंने कहा कि कुल वित्तीय अनुबंधों में द्विपक्षीय अनुबंध की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है, जबकि बहुपक्षीय अनुबंध की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत हैं। इस विधेयक के माध्यम से भारतीय वित्तीय बाजार में अर्हित वित्तीय संविदाओं की द्विपक्षीय नेटिंग की प्रवर्तनीयता का उपबंध करके वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि जब दो पक्ष एक दूसरे की देनदारियों का निपटान इस प्रकार करते हैं जिसके उपर ज्यादा देनदारी हो, वह एक तय राशि का भुगतान दूसरे के पक्ष में करे, तो उसे नेटिंग कहते हैं । विधेयक पर हुयी संक्षिप्त चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के सुरेश प्रभु ने कहा कि वित्तीय बाजार वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होते हैं क्योंकि वे बाजार के लिए तरलता उपलब्ध कराते हैं। इस लिए इन बाजारों का नियमन करना चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने सरकार के विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि इसमें नियमन के लिए जो कदम उठाये हैं, उससे बाजार के प्रोत्साहन मिलेगा। अन्नाद्रमुक के ए विजय कुमार ने जहां इस विधेयक का समर्थन करते हुए इस संबंध में कई सुझाव दिये, वहीं बीजू जनता दल के सुजीत कुमार ने यह विधेयक लाने के लिए सरकार को बधाई देते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए मील का पत्थर करार दिया। तेलुगु देशम पार्टी के के रवीन्द्र कुमार और भाजपा के महेश पोद्दार ने भी इस विधेयक का समर्थन किया। पोद्दार ने कहा कि यह भविष्योन्मुखी कदम साबित होगा। उल्लेखनीय है कि विधेयक पर चर्चा के दौरान ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। सदन में रविवार को हुए हंगामे को लेकर आठ विपक्षी सदस्यों के निलंबन के विरोध में विपक्ष के कई दलों के सदस्य सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर रहे हैं।
कोरोना महामारी के मद्देनजर राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । राज्यसभा के 252 वें सत्र की कार्यवाही कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न असाधारण स्थिति के मद्देनजर बुधवार को निर्धारित अवधि से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी।
राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किये जाने से पहले अपने समापन वक्तव्य में कहा कि कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न असाधारण हालातों को देखते हुए सदन की कार्यवाही निर्धारित तिथि आगामी एक अक्टूबर से पहले आज ही स्थगित की जा रही है। सत्र की शुरूआत गत 14 सितम्बर को विशेष सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी एहतियाती कदमों के साथ शुरू हुई थी।
श्री नायडू ने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस सत्र में सदन की 18 बैठकें होनी थी लेकिन केवल 10 बैठकें ही हो सकी हैं। उन्होंने सत्र के दौरान हुए कामकाज पर संतोष व्यक्त किया लेकिन इस दौरान सदन में विपक्ष के व्यवहार को लेकर चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भविष्य में इस तरह का अशोभनीय आचरण नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इस दौरान 25 विधेयक पारित किये गये और छह पेश किये गये। शून्यकाल में 92 और विशेष उल्लेख के तहत 62 मुद्दे उठाये गये। इसके अलावा रक्षा मंत्री ने चीन सीमा पर स्थिति और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा हर्षवर्धन ने कोरोना महामारी के संबंध में वक्तव्य दिये।
गहलोत ने प्रदेश की प्रथम भूमिगत मेट्रो का किया लोकार्पण

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की प्रथम भूमिगत मेट्रो रेल चांदपोल से बड़ी चौपड़ का आज यहां लोकार्पण किया।
श्री गहलोत ने मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जयपुर मेट्रो चरण (प्रथम) बी के तहत चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक बनी भूमिगत जयपुर मेट्रो का लोकार्पण किया। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर मेट्रो रेल को रवाना किया और भूमिगत मेट्रो रेल की शुरुआत की।
इस अवसर पर श्री गहलोत ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि आज का दिन इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। उन्होंने कहा कि रास्ते में मंदिरों के होने से लोगों की धार्मिक भावना का ध्यान रखना एवं विरासत को बचाते हुए यहां भूमिगत मेट्रो रेल के लिए काम करना काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन जनता की भावनाओं का ध्यान रखते हुए काम किया गया और इसमें व्यापारियों एवं लोगों ने साथ दिया और दिल्ली मेट्रो रेल की सहायता से इस काम को पूरा किया गया।
उन्होंने कहा कि इस भूमिगत मेट्रो रेल का काम ढाई साल में पूरा होने की उम्मीद थी लेकिन सरकार के बदल जाने के कारण इसमें विलंब हुआ। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के सहारे तमाम सावधानी बरती गई और इस चुनौतीपूर्ण काम में बिना किसी दुर्घटना एवं नुकसान के काम पूरा हुआ और यह विश्व स्तरीय मेट्रो रेल बनी है। जयपुर मेट्रो प्रथम बी का शिलान्यास सितंबर 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह ने किया था।
उन्होंने कहा कि जयपुर से बड़े अन्य शहरों से पहले इसका काम शुरु हुआ और काम पूरा भी कर लिया गया। उन्होंने कहा कि जयपुर में जब पहले चरण में रेल बनी तब उनकी आलोचना हुई थी और कहा गया था कि यह महंगा और घाटे का सौदा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें यह घाटे नफा नहीं देखा जाता। यह सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी है।
श्री गहलोत ने कहा कि राजधानी में सीतापुरा से अंबाबाड़ी तक 22 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल का सपना भी है और इसके प्रति भी उनका ध्यान है। कोरोना के चलते इसमें भी विलंब हो रहा है और वह चाहेंगे कि इसे भी शुरु किया जाये। उन्होंने कहा कि जयपुर के अलावा प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर में भी मेट्रो रेल चलाने की बात है। अब देखना यह है कि इसमें केन्द्र सरकार कितना सहयोग करती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को मेट्रो को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना में जहां राज्य सरकारें अच्छा काम कर रही है उन्हें केन्द्र सरकार को और बढ़चढ़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते केन्द्र सरकार के बीस लाख करोड़ रुपए का पैकेज से काम चलने वाला नहीं है।
इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने मेट्रो का काम धीमा किया, अगर इस दौरान कांग्रेस की सरकार होती तो यह काम बहुत पहले हो चुका होता। उन्होंने कहा कि जयपुर मेट्रो का किराया देश में सबसे कम है। इस अवसर पर सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने भूमिगत मेट्रो के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और उनसे जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण के बारे में विचार करने का आग्रह किया।
इस मौके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, कई सांसद, विधायक एवं मुख्य सचिव राजीव स्वरुप, जयपुर एवं दिल्ली मेट्रो के अधिकारी इस कार्यक्रम से जुड़े।
सरकार जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के प्रति वचनबद्ध : रेड्डी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने आज कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर में सभी क्षेत्रीय भाषाओं को बढावा देने तथा उनके विकास के प्रति वचनबद्ध है।
श्री रेड्डी ने आज राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020 पर हुई बेहद संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों की बहुत पुरानी मांग थी कि डोगरी, हिन्दी और कश्मीरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में उर्दू और अंग्रेजी के साथ डोगरी, हिन्दी और कश्मीरी को केन्द्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जा रहा है।
उनके जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया जिससे इस पर संसद की मुहर लग गयी। लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवार को ही पारित किया था। विधेयक पारित होने के समय विपक्ष के अनेक दल सदन में मौजूद नहीं थे।
उन्होंने कहा कि सरकार सदस्यों की भावना के अनुरूप केन्द्र शासित प्रदेश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं विशेष रूप से पंजाबी, पहाडी और गुजरी के विकास के प्रति वचनबद्ध है। इन भाषाओं के विकास के संबंध में विधेयक में भी प्रावधान किये गये हैं।

एलएसी पर चीन की रखवाली करेंगे अमेरिकी रीपर ड्रोन
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से 30 जनरल एटॉमिक्स एमक्यू-9ए रीपर ड्रोन खरीदेगा। यह सौदा लगभग 3 बिलियन डॉलर यानी 22 हजार करोड़ रुपये का होगा। सौदे के पहले चरण में छह ड्रोन तत्काल एकमुश्त नगद भुगतान करके खरीदे जायेंगे। मौजूदा जरूरतों को देखते हुए फिलहाल दो-दो ड्रोन तीनों सेनाओं को दिए जायेंगे। यह सौदा चीन से तनाव के चलते जल्द से जल्द पूरा किये जाने की तैयारी है क्योंकि इन्हें ड्रैगन की रखवाली के लिए तैनात किया जाना है। बाकी 24 ड्रोन अगले तीन वर्षों में हासिल कर लिए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने आंतरिक बैठकों के बाद छह रीपर मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोनों की खरीद का रास्ता साफ कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि सेनाओं को कुल 30 ड्रोन की जरूरत है, इसलिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की अगली बैठक में इसकी मंजूरी का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा जाएगा। इस अनुबंध को दो भागों में बांटकर लगभग 600 मिलियन डॉलर (4,400 करोड़ रुपये) के छह एमक्यू-9ए ड्रोन अगले कुछ महीनों में नगद पैसे देकर खरीदे जाएंगे। इसी में से 2-2 ड्रोन सेना, वायुसेना और नौसेना को दिए जायेंगे। इसके बाद बाकी 24 ड्रोन एक अनुबंध के तहत अगले तीन वर्षों में हासिल कर लिए जाएंगे जिसमें से तीनों सेनाओं को 8-8 ड्रोन फिर दिए जाएंगे।अमेरिका से तुरंत खरीदे जाने वाले छह ड्रोन को हेलफायर मिसाइलों और अन्य एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल से लैस किया जाएगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह सौदा पिछले तीन वर्षों से लंबित है। 2017 में यह अत्याधुनिक ड्रोन सिर्फ भारतीय नौसेना के खरीदे जाने थे लेकिन बाद में इसे तीनों सेनाओं के लिए खरीदने का फैसला लिया गया। तब अमेरिकी सरकार ने 2018 में भारत को एमक्यू-9 के सशस्त्र संस्करण बेचने की मंजूरी भी दे दी थी।रक्षा मंत्रालय द्वारा हार्डवेयर की खरीद के लिए स्वीकृति की आवश्यकता (एओएन) औपचारिक रूप से पहला कदम है। इस तरह के खरीद मामलों को अनुबंध में बदलने की प्रक्रिया में आमतौर पर कई साल लग जाते हैं लेकिन चीन से तनाव के चलते मौजूदा जरूरतों को देखते हुए एमक्यू-9ए ड्रोन की खरीद जल्द पूरी कर ली जाएगी। भारत सरकार इसे अमेरिकी सरकार के साथ समझौते के तहत फास्ट-ट्रैक के जरिए खरीदेगी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने इस सौदे की प्रक्रिया को रक्षा मंत्रालय की उन बैठकों में आगे बढ़ाया है जिसमें स्थायी समिति के चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के रूप में अंतर-सेवा रक्षा अधिग्रहण पर फैसले लिए जाते हैं। इस सौदे को मंजूरी देने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की जल्द ही विशेष बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हो सकती है। यह प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकारों के बीच हस्ताक्षरित अंतिम प्रमुख समझौता है क्योंकि अमेरिका में इसी साल 3 नवम्बर को चुनाव होने हैं।
तमिलनाडु : ऋण के लिए हिंदी जानना जरूरी कहने वाले बैंक मैनेजर का तबादला

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । ऐसे समय में जब तमिलनाडु में प्रमुख राजनीतिक दल केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगा रहे हैं, अरियालुर जिले के एक डॉक्टर ने आरोप लगाया कि उन्हें हिंदी नहीं आने के कारण इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के मैनेजर ने लोन नहीं दिया।

ममाला सामने आने के बाद बैंक मैनेजर का तबादला कर दिया गया है।

बुजुर्ग डॉक्टर सी. बालासुब्रमण्यन ने यह भी आरोप लगाया कि आईओबी का मैनेजर उनके और उनके इंजीनियर दोस्त के साथ ढंग से पेश नहीं आया था।

बैंक ने मैनेजर का तबादला त्रिची में अपने क्षेत्रीय कार्यालय में कर दिया है।

बालासुब्रमण्यम के अनुसार, वह लंबे समय से आईओबी के कस्टमर रहे हैं और उन्होंने जयमकोंदम ब्रांच से संपर्क कर एक भवन के निर्माण के लिए ऋण लेने के लिए मैनेजर विशाल कांबले से मुलाकात की थी।

डॉक्टर ने मैनेजर को संपत्ति के दस्तावेजों को भी ऋण के लिए जमानत के रूप में दिखाया।

जैसा कि संपत्ति के दस्तावेज तमिल में थे, कांबले ने कथित तौर पर बालासुब्रमण्यम से कहा कि वह राज्य की भाषा नहीं जानते हैं और पूछा कि क्या डॉक्टर हिंदी जानते हैं।

बालासुब्रमण्यम के अनुसार, उन्होंने बैंकर से कहा कि वह उन दस्तावेजों को अंग्रेजी में समझाएंगे, जिससे बैंकर सहमत नहीं हुआ और भाषा संबंधी समस्या कहकर ऋण देने से मना कर दिया।

डॉक्टर ने कहा कि बैंकर किसी वैध कारण की वजह से ऋण देने से मना कर सकता था लेकिन उसने कहा कि वह महाराष्ट्र से है और भाषा की समस्या के कारण ऋण देने को अस्वीकार कर दिया।

दीपावली से शुरू हो सकती है कुशीनगर से अंतरराष्ट्रीय हवाईसेवा

लखनऊ, 23 सितंबर (वेबवार्ता)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पूर्वाचल के लोगों को दीपवाली के अवसर पर तोहफो देने जा रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली तक कुशीनगर हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरा क्षेत्र बौद्घ परिपथ का हिस्सा है। दीपावली के अवसर पर कुशीनगर से अंतरराष्ट्रीय वायु सेवा शुरू करने की योजना है। यह एयरपोर्ट विदेशी धर्मावलंबियोंको सुगमता प्रदान करने वाला होगा।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर से लगभग 52 किलोमीटर दूर कुशीनगर जिले में स्थित इस हवाई अड्डे को पडरौना हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है।

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस साल जून में कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया गया था। कुशीनगर देश में 29वां और यूपी में आगामी जेवर हवाई अड्डे सहित चौथा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता के गलियारे से ‘परिक्रमा संस्कृति’ खत्म की : नकवी

आईटीआर 30 सितम्बर तक फाईल करना है जरूरी : आयकर विभाग

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । आयकर विभाग ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) 30 सितम्बर तक दाखिल करना जरूरी है। आयकर विभाग ने बुधवार को ट्वीट करके कहा कि आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ रही है। इसीलिए टैक्सपेयर्स को जल्द से जल्द अपना आयकर रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। गौरतलब है कि आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आईटीआर फाइलिंग की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 सितम्बर, 2020 कर दिया था। पहले ये डेडलाइन 31 जुलाई, 2020 थी। वहीं, वित्त वर्ष 2019-20 के लिए रिटर्न फाइल करने की तारीख बढ़ाकर 30 नवम्बर, 2020 तक किया जा चुका है। आयकर विभाग ने कोविड-19 संक्रमण की वजह से ये तिथि बढ़ाई थी, जबकि आमतौर पर इसकी अंतिम तारीख 31 जुलाई होती है। उल्लेखनीय है कि यदि कोई टैक्सपेयर्स इस डेडलाइन तक रिटर्न फाइल नहीं करता है तो वह रिटर्न फाइल नहीं कर पाएगा। आमतौर पर तय तिथि तक इनकम टैक्स रिटर्न नहीं फाइल करने पर जुर्माना लगाया जाता है। आयकर विभाग के मुताबिक तय समय-सीमा खत्म होने के बाद 31 दिसम्बर तक रिटर्न फाइल करने पर पांच हजार रुपये पेनाल्टी भरनी होगी, जबकि दिसम्बर के बाद रिटर्न फाइल किया तो 10 हजार रुपये जुर्माना देना होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने पिछले महीने आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि तीसरी बार बढ़ाई थी।

टिकटॉक ने हटाए भारत के प्रतिबंधित सामग्री वाले 3.7 करोड़ वीडियो

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । चीनी शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक ने सामुदायिक दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले 10.4 करोड़ से ज्यादा वीडियो को इस साल की पहली छमाही में अपने प्लेटफॉर्म से हटाया है। इसमें 3.7 करोड़ वीडियो भारत के थे। भारत के बाद दूसरे स्थान पर अमेरिका है, जहां के 98 लाख वीडियो हटाए गए। अमेरिका में टिकटॉक पर प्रतिबंध लग गया है और ओरेकल-वॉलमार्ट द्वारा इसे खरीदने की उम्मीद है।

हालांकि हटाए गए इन वीडियो की संख्या इस ऐप पर अपलोड किए गए सभी वीडियो की कुल संख्या से 1 प्रतिशत से भी कम है। भारत में इस ऐप पर प्रतिबंध लगने के पहले टिकटॉक के देश में करीब 20 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जो कि इसके अमेरिकी बाजार से लगभग दोगुना था। भारत और अमेरिका के अलावा, पाकिस्तान, ब्राजील और ब्रिटेन से भी क्रमशः 64 लाख, 55 लाख और 29 लाख वीडियो हटाए गए हैं।

जेडडीनेट की रिपोर्ट के अनुसार, उपयोगकर्ताओं द्वारा रिपोर्ट किए जाने से पहले ही 96.3 प्रतिशत वीडियो की पहचान कर उन्हें हटा दिया गया था, जबकि 90.3 प्रतिशत को बाद में हटाया गया। सबसे ज्यादा 30.9 फीसदी वीडियो को न्यूडिटी और यौन गतिविधियों के कारण जबकि 22.3 फीसदी को मामूली सुरक्षा का उल्लंघन करने के लिए और 19.6 फीसदी को गैरकानूनी गतिविधियों के कारण हटाया गया था। टिकटॉक ने कहा है कि उसे कुछ सामग्री को प्रतिबंधित करने या हटाने के लिए सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ आईपी राइट्स होल्डर से भी कानूनी अनुरोध प्राप्त हुए थे।
वर्चुअल तौर पर आपको ऑफिस ले जाएगा माइक्रोसॉफ्ट का टीम्स ऐप

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । महामारी के मद्देनजर माइक्रोसॉफ्ट ने अपने वीडियो मीट ऐप ‘टीम्स’ में एक अनोखे फीचर की घोषणा की है, जो आपको वर्क फ्रॉम होम के पहले कार्यालय जाने जैसा अनुभव देगा। टीम्स में आगामी फीचर ‘वर्चुअल कम्यूट’ आपको अपने दूरस्थ वर्कडे के लिए मानसिक तौर पर तैयार करने और कार्य दिवस को आसानी से शुरू करने और उसे खत्म करने को आसान बना देगा।

कंपनी ने मंगलवार को अपने ‘माइक्रोसॉफ्ट इग्नाइट 2020’ सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि, हम यह भी साझा करने के लिए उत्साहित हैं कि हम ‘टीम्स’ में अपने काम के प्रवाह में माइंडफुलनेस एक्सपीरियंस और विज्ञान समर्थित मेडिटेशन का एक क्यूरेट सेट लाने के लिए हेडस्पेस के साथ साझेदारी कर रहे हैं।

माइक्रोसॉफ्ट 365 के कॉपोर्रेट उपाध्यक्ष जारेड स्पातारो ने विस्तृत तौर पर बताया, ‘इस बारे में सोचें कि हम पूरे दिन क्या करते थे और दिन खत्म होने के बाद हम सब क्लियर करने के बारे में क्या सोचते थे। और इसलिए यह वर्चुअल कम्यूट का अनुभव आपको एक कदम वापस लेने की अनुमति देता है, फिर से आप अपने वर्कडे से बाहर आने और अपने विचारों को व्यवस्थित करने में मदद करेगा।’

अन्य विशेषताओं में मेडिटेशन ब्रेक और वर्क हैबिट भी शामिल हैं। इसकी शुरुआत अक्टूबर में हो रही है। इससे व्यक्तियों, प्रबंधकों और व्यावसायिक लीडर्स को एक बेहतर दिन, एक बेहतर सप्ताह और खुद के लिए, अपनी टीमों और अपने संगठनों के लिए एक बेहतर अनुभव प्राप्त होगा।

माइक्रोसॉफ्ट ने आगे कहा, ‘2021 में टीम्स में आने वाली अतिरिक्त सुविधाओं के साथ, प्रबंधक परिवर्तन कार्यक्रमों को लॉन्च करने और ट्रैक करने में सक्षम होंगे, जो टीम के सदस्यों को घंटों की बातचीत से बचने और सुकुन भरे दिनों को संरक्षित करेंगे। यह साप्ताहिक सारांश टीम के सदस्यों को उनकी प्रगति की निगरानी करने और सफलताओं का जश्न मनाने के लिए सशक्त करेगा।’
नियम-कायदे वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और अमेरिका के साझे हित हैंः बाइडेन

वाशिंगटन, 23 सितंबर (वेबवार्ता)। अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने कहा कि नियम-कायदे वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत एवं अमेरिका के मजबूत साझे हित हैं, जहां चीन समेत कोई भी किसी को धमकाए नहीं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका बेहतर भविष्य के लिए क्षेत्र को निश्चित ही आकार दे सकते हैं। बाइडेन ने चुनाव प्रचार के लिए चंदा एकत्र करने के मकसद से भारतीय अमेरिकियों के लिए आयोजित एक डिजिटल कार्यक्रम में कहा, ‘‘नियम-कायदे वाले ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और भारत के मजबूत साझे हित हैं, जहां चीन समेत कोई भी देश अपने पड़ोसियों को डराता-धमकाता नहीं हो।’’ इस कार्यक्रम में 268 लोग शामिल हुए। बाइडेन ने आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन के लिए ऐसे समय में जगह बना रहे हैं, जब वह हिंद प्रशांत में अपने पड़ोसियों और अमेरिकी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने पूर्व सर्जन डॉ. विवेक मूर्ति के साथ संवाद के दौरान कहा, ‘‘हम बेहतर भविष्य के लिए हिंद-प्रशांत की व्यवस्था को निश्चित ही आकार दे सकते हैं। हम इसे दुरुस्त कर सकते हैं। यह चुनाव हमारा भविष्य तय करेगा।’’ बाइडेन ने पहले अमेरिकी सांसद और फिर देश के उपराष्ट्रपति के रूप में भारत के साथ अपने पुराने संबंधों एवं कई दशकों में किए अपने कार्य का जिक्र करते हुए कहा कि उनका प्रशासन दोनों देशों के संबंधों को महत्व देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह तस्वीर खिंचाने या हाथ मिलाने का अवसर खोजने का समय नहीं, बल्कि चीजें करके दिखाने की बात है।’’ बाइडेन ने कहा कि उन्होंने 15 साल पहले रिपब्लिकन पार्टी के सांसद रिचर्ड लुगर के साथ सीनेट विदेश संबंध समिति का नेतृत्व किया था और ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को मंजूरी दी था। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कहा था कि भारत और अमेरिका जब निकट मित्र बनेंगे, तो दुनिया अधिक सुरक्षित होगी। उपराष्ट्रपति के रूप में सात साल पहले मैंने मुंबई में एक कारोबारी से कहा था कि अमेरिका और भारत की साझीदारी 21वीं सदी में महत्वपूर्ण संबंध साबित होगी।’’ बाइडेन ने कहा, ‘‘मैं यह अब नहीं कह रहा, मैंने तब यह कहा था और मैं वाकई ऐसा ही मानता हूं।’’ उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति के तौर पर भी इस पर भरोसा करना जारी रखेंगे। पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि ऐसा हो।’’ बाइडेन ने कहा कि वह क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ भारतीयों के साथ खड़े रहने, भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक स्वास्थ्य जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने की बात लंबे समय से करते आए हैं।
अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखे तुर्की : भारत

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 23 सितंबर । तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन के संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए बेतुके बयान का संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए।
श्री तिरुमूर्ति ने ट्वीट कर कहा, ‘हमने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति के बयान को पढ़ा है और उनका भारत के आतंरिक मामलों में दखल देना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और अपनी नीतियों पर विचार करना चाहिए।’
तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से दरअसल एक बार फिर कश्मीर को लेकर जहर उगलते हुए कहा है कि कश्मीर एक ज्वलंत मुद्दा है और जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।

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