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Home›News›प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता के गलियारे से ‘परिक्रमा संस्कृति’ खत्म की : नकवी

प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता के गलियारे से ‘परिक्रमा संस्कृति’ खत्म की : नकवी

By Antim Pravakta
September 20, 2020
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अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । नई दिल्ली, 18 सितंबर (वेबवार्ता)। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता के गलियारे से ‘परिक्रमा संस्कृति’ को खत्म कर ‘परिश्रम और परिणाम’ को प्रमाणिक बनाया है। उन्होंने ‘परिश्रम और परिणाम के संकल्प ने खत्म की परिक्रमा संस्कृति’ शीर्षक वाले ब्लॉग में नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से पिछले छह वर्षों में किए गए कार्यों का विस्तृत उल्लेख किया। नकवी ने कहा, ‘‘सत्ता और सियासत के गलियारे में दशकों से परिक्रमा को ही पराक्रम समझने वाले आज परिश्रम और परिणाम की कार्य संस्कृति के चलते हाशिये पर चले गए हैं। मोदी ने सत्ता के गलियारे से परिक्रमा संस्कृति को खत्म कर परिश्रम और परिणाम को प्रमाणिक बनाया है।’’ मंत्री ने कहा, ‘‘सामंती गुरुर वाली लाल बत्ती इतिहास का हिस्सा बन गई। सांसदों को सब्सिडी ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ लगती थी, जो एक झटके में खत्म हुई। मंत्री-सांसद ना रहने के बावजूद कुछ लोगों को सरकारी बंगलों पर कब्जा रखना ‘संवैधानिक अधिकार’ लगता था, उसे खत्म किया गया।’’ नकवी के अनुसार, पहले मंत्रालयों का मार्च से पहले बजट को ऊल-जुलूल तरीके से खत्म करना सरकार की प्राथमिकता थी जिसके चलते उपयुक्त खर्च का प्रयास नहीं होता था, यह काम चलाऊ दकियानूसी व्यवस्था खत्म हुई। उन्होंने कहा, ‘‘सरकारें बदलती थीं, मंत्री बदलते थे पर वर्षों से मंत्रियों के निजी स्टाफ वही रहते थे, जिसका नतीजा होता था कि सत्ता के गलियारे में घूमने वाले बिचौलिए उस निजी स्टाफ के जरिये बरकरार रहते थे। 10 वर्षों से जमे निजी स्टाफ को मंत्रालय में रखने पर रोक लगाकर प्रधानमंत्री ने पेशेवर बिचौलियों के पर काट दिए।’’ अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों के साथ-साथ अधिकारियों से ‘संवाद संस्कृति’ शुरू की, जिसके चलते नौकरशाही की जवाबदेही-जिम्मेदारी बढ़ी है। पदम् पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान पहले केवल सियासी सिफारिशों के जरिये दिए जाते थे। आज उन लोगों को यह सम्मान दिया जा रहा है जो वास्तव में इसके हकदार हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह सब बातें हो सकता है छोटी हों, पर ‘परिक्रमा के पराक्रम’ की जगह ‘परिश्रम एवं परिणाम’ की कार्य संस्कृति को पैदा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई हैं।’’ नकवी के अनुसार, कोरोना संकट के समय प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता, सक्रियता एवं इस संकट से देश को निजात दिलाने में अग्रिम भूमिका ने देश के लोगों में भरोसा बढ़ाया। भारत जैसे विशाल देश के लिए यह बड़ा संकट का समय रहा, पर देश के लोग इस संकट से कम से कम प्रभावित हों इसका भरपूर प्रबंधन-प्रयास प्रधानमंत्री की ‘परिश्रम-परफॉर्मेंस एवं परिणाम’ की कार्य संस्कृति का जीता-जागता सुबूत हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐसे कई काम हुए जिनसे भारत की साख पूरे विश्व में बढ़ी। योग को पूरी दुनिया में पहचान मिलीय भारत अंतरिक्ष महाशक्ति बना। सऊदी अरब, फिलिस्तीन, रूस, यूएई जैसे देशों ने मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक हुईय वन रैंक वन पेंशन, स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ लागू हुआ, तीन तलाक, हज सब्सिडी खत्म हुईय अनुच्छेद 370 हटाया गया और राम मंदिर का निर्माण आरंभ हुआ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश का आर्थिक ताना-बाना आज भी सही दिशा और सही हाथों में है। आने वाले दिनों में भारत की अर्थव्यवस्था फिर से मजबूती के मार्ग पर आगे बढ़ेगी।’’

विस्तारा ने विमान के भीतर वाई-फाई सेवा शुरू की
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त उपक्रम वाली विमान सेवा कंपनी विस्तारा ने विमान के भीतर वाई-फाई सेवा शुरू की है। विमान के भीतर वाई-फाई की सुविधा देने वाली विस्तारा देश की पहली एयरलाइन बन गई है। उसने आज बताया कि हाल ही में उसके बेड़े में शामिल होने वाले बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान में 18 सितंबर से यात्रियों को यह सुविधा मिलेगी। बाद में एयरबस ए321 निओ विमानों में भी इसकी शुरुआत होगी। इस विमान का परिचालन दिल्ली से लंदन मार्ग पर किया जायेगा। सरकार ने पिछले दिनों देश के वायु क्षेत्र में विमान के अंदर वाई-फाई के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। विस्तारा ने बताया कि उसके सभी यात्रियों के लिए कुछ अवधि के लिए वाई-फाई निःशुल्क होगा। इस दौरान कंपनी सिस्टम के कामकाज के आंकड़े जुटायेगी और यात्रियों से फीडबैक लेगी। यह सुविधा देने के लिए कंपनी ने पैनासोनिक एवियोनिक्स के साथ करार किया है। यात्री अपने मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप पर इंटरनेट से जुड़ सकेंगे।

रास में उठी पंजाब में अवैध शराब फैक्टरियों पर रोक लगाने की मांग
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । पंजाब में कथित अवैध शराब फैक्ट्रियों पर रोक लगाने की मांग करते हुए राज्यसभा में कांग्रेस के एक सदस्य ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें मिल रहा संरक्षण बंद किया जाना चाहिए। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के शमशेर सिंह ढुल्लों ने कहा कि गैरकानूनी तरीके से चलाई जा रही इन डिस्टलरियों की जहरीली शराब पिछले माह 136 लोगों की जान ले चुकी है और करीब 150 लोगों का अस्पतालों में इलाज चला। कई लोगों पर जहरीली शराब के कारण गंभीर दुष्प्रभाव पडे हैं, किसी की आंखें चली गईं और किसी के गुर्दे खराब हो गए। उन्होंने प्रभावित लोगों को मुआवजा दिए जाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि अवैध शराब बनाने वाली फैक्टरियों को संरक्षण दिया जा रहा है जिसे बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी अवैध नौ फैक्टरियां पकडी जा चुकी हैं लेकिन इनके मालिकों को अब तक नहीं पकडा गया है। ढुल्लों ने कहा कि यह अवैध शराब पडोसी राज्यों हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश आदि में बेची जाती है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार हस्तक्षेप करे और ऐसी फैक्टरियां बंद कराए। शून्यकाल में ही बीजद के मुजीबुल्ला खान ने कहा कि पिछले 40 साल से ओडिशा में अल्पसंख्यकों की आबादी मात्र दो फीसदी या तीन फीसदी ही बताई जा रही है। उन्होंने कहा ‘‘ ऐसा कैसे हो सकता है? जरूर इसमें कहीं कुछ चूक हो रही है या कोई समस्या है। इसे दूर किया जाना चाहिए अन्यथा अल्पसंख्यकों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।’’ भाजपा के टी जी वेंकटेश ने शून्यकाल में कहा कि कई थर्मल पॉवर परियोजनाएं बंद हो गईं क्योंकि बिजली बोर्ड बिलिंग चार्ज के रूप में अधिक कीमत वसूलते हैं। दुनिया भर में यह कीमत मात्र 40 पैसा है जबकि हमारे देश में यह बहुत ज्यादा है। अन्नाद्रमक के एम थंबीदुरई ने कहा कि तमिलनाडु कृषि के क्षेत्र में अग्रणी है और कोरोना वायरस महामारी की वजह से उसे आर्थिक संकट का सामना करना पड रहा है इसलिए केंद्र सरकार उसकी लंबित ‘सीएमआर’ सब्सिडी की राशि यथाशीघ्र जारी करे। राकांपा की फौजिया खान ने भूमि अधिकार के रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से तैयार करने की मांग करते हुए कहा कि जमीन के स्वामत्वि अधिकार से जुडे कई मामले अदालतों में लंबित हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘‘लैंड टाइटलिंग एक्ट’’ का मसौदा जारी किया जा चुका है। अतः सरकार जल्द से जल्द संबंधित विधेयक लाए ताकि लोगों की परेशानी दूर हो सके। शून्यकाल में ही द्रमुक के तिरूचि शिवा ने आरक्षण और स्थानीय स्तर पर बढती बेरोजगारी का, वहीं माकपा के इलामारम करीम ने भविष्य निधि पेंशन योजना से जुडे मुद्दे उठाए।

विपक्ष का सवाल : होमियोपैथी केंद्रीय परिषद के गठन में देरी क्यों हुयी

सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद के गठन में तीन साल क्यों लग गए। कांग्रेस सदस्य रिपुन बोरा ने कहा कि होमियोपैथी केंद्रीय परिषद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उसके स्थान पर संचालक मंडल की स्थापना की गयी थी। शुरू में कहा गया था कि एक साल के अंदर परिषद का गठन कर लिया जाएगा। बाद में वह समय बढ़ाकर दो साल कर दिया। अब इसके लिए तीन साल की बात की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि दो साल बीत जाने के बाद भी इस परिषद का गठन नहीं हो सका। बोरा सदन में होमियोपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 पर एक साथ हुयी चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल किया कि परिषद के गठन में इतनी देर क्यों हुयी कि सरकार को अध्यादेश और अब विधेयक लाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का इरादा इसमें देर करने का है। सपा सदस्य रामगोपाल वर्मा ने भी होमियोपैथी परिषद के गठन में देरी पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार समय से परिषद का गठन क्यों नहीं कर पा रही है। यादव ने होमियोपैथी और आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता का जिक्र करते हए कहा कि भारत में करीब 70 प्रतिशत लोग इनसे इलाज कराते हैं। उन्होंने एलोपैथी पद्धति के महंगा होने का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ अस्पतालों में तो कोरोना वायरस के इलाज पर एक लाख रूपए रोज लिए जा रहे हैं। यादव ने भारतीय पद्धतियों की खूबियों की चर्चा करते हुए कहा कि कई रोग ऐसे हैं जिनका इलाज एलोपैथी में नहीं है। इसके पहले इलामारम करीम, के के रागेश, विनय विश्वम और केसी वेणुगोपाल ने पिछले दिनों जारी होमियोपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश तथा भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) अध्यादेश को नामंजूर करने के लिए संकल्प पेश किया। केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने दोनों विधेयक पेश करते हुए कहा कि होमियोपैथी परिषद अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा और उस पर अनियमितताएं, पारदर्शिता का अभाव तथा भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसलिए परिषद के स्थान पर संचालक मंडल की स्थापना की गयी थी। जारी

राज्यसभा ने अशोक गस्ती, कपिला वात्स्यायन को श्रद्धांजलि दी, कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । राज्यसभा ने शुक्रवार को अपने मौजूदा सदस्य अशोक गस्ती और पूर्व सदस्य कपिला वात्स्यायन का निधन होने पर उनको श्रद्धांजलि दी और उनके सम्मान में आधे घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गयी। सभापति एम वेंकैया नायडू ने सुबह उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर भाजपा नेता अशोक गस्ती और कपिला वात्स्यायन के निधन का जिक्र किया। गस्ती उच्च सदन में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रहे थे वहीं कपिला दो बार उच्च सदन की मनोनीत सदस्य रहीं। नायडू ने कहा कि 55 वर्षीय गस्ती का कल रात एक अस्पताल में निधन हो गया। वह गंभीर रूप से बीमार थे। पेशे से वकील गस्ती छात्र जीवन से सार्वजनिक जीवन में आ गए थे और वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए थे। समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए काम करने वाले गस्ती ने हाल ही में उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली थी लेकिन वह सदन की कार्यवाही में भाग नहीं ले सके। नायडू ने कहा कि वह गस्ती को उनके छात्र जीवन से ही जानते थे और वह जमीन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा कि अपने किसी सहयोगी को खोना काफी दुखद होता है। उन्होंने कपिला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पद्म विभूषण और राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनकी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुई थी। कपिला प्रख्यात शिक्षाविद और भारतीय संस्कृति एवं कला की विशेषज्ञ भी थीं। उनका 16 सितंबर को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। सदस्यों ने दिवंगत आत्माओं के सम्मान में कुछ क्षणों का मौन रखा और उसके बाद उनके सम्मान में सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गयी।
राष्ट्रपति ने हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा किया स्वीकार

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा शुक्रवार को स्वीकार कर लिया। कौर ने कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन विधेयकों के विरोध में बृहस्पतिवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति भवन ने एक बयान में कहा, ‘‘ भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल से हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा तत्काल स्वीकार कर लिया है।’’ उसने कहा कि प्रधानमंत्री के सुझाव पर राष्ट्रपति ने कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। तोमर के पास कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय सहित कई विभाग हैं। कौर ने लोकसभा में इन विधेयकों के पारित होने से महज कुछ ही घंटे पहले ट्वीट किया था, ‘‘मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और विधेयकों के विरोध में केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों की बेटी और बहन के तौर पर उनके साथ खड़े होने पर गर्व है।’’ लोकसभा ने बृहस्पतिवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक पारित कर दिया था। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक पहले ही पारित हो चुका है।

कृषि से जुड़े विधेयकों पर मायावती का विरोध, चिदंबरम बोले- इसका पास होना लोगों और सरकार के बीच की दूरी को दिखाता है

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । लोक सभा में पास हुए कृषि विधेयकों पर पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार का कदम लोगों और सरकार के बीच की दूरी को दिखाता है। उन्होंने साथ ही कहा कि इस बिल पर राज्यों से सलाह नहीं ली गई। ये राज्य के अधिकारों और संघवाद पर भी हमला है। वहीं, मायावती ने भी कहा कि वे सरकार के कदम से सहमत नहीं हैं।

पी चिदंबरम ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘किसानों से जुड़े दो अध्यादेश लोकसभा में पास हो गए। पंजाब और हरियाण के किसान सड़कों पर हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। ये लोगों और सरकार के बीच की दूरी के दर्शाता है।’ चिदंबरम ने तमिलनाडु का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘तमिलनाडु के किसानों ने मुझे बताया है कि वे निजी ट्रेडर्स को धान 850 रुपये में बेच रहे हैं जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1150 रुपये है। तमिलनाडु सरकार को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।’

वहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी बिल पर विरोध जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘संसद में किसानों से जुड़े दो बिल, उनकी सभी शंकाओं को दूर किये बिना ही, कल पास कर दिये गये हैं। उससे ठैच् कतई भी सहमत नहीं है। पूरे देश का किसान क्या चाहता है? इस ओर केन्द्र सरकार जरूर ध्यान दे तो यह बेहतर होगा।’

बता दें कि लोकसभा ने हंगामे के बीच गुरुवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक पारित कर दिया। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक पहले ही पारित हो चुका है।

इसे लेकर खूब हंगमा भी हुआ। एनडीए की अहम साझेदार शिरोमणी अकाली दल की हरसीमरत कौर ने बिल के विरोध में गुरुवार को इस्तीफा भी दे दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल पास होने के बाद ट्वीट कर इसे ऐतिहासिक बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे। हालांकि, इन विधेयकों के विरोध में देश के कुछ हिस्सों खासकर कृषि प्रधान पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसान प्रदर्शन भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को ‘भ्रमित’ करने में ‘बहुत सारी शक्तियां’ लगी हुई हैं।

कृषि बिलों के विरोध में पंजाब कांग्रेस के विधायक नागरा का इस्तीफा, अन्य विधायक भी दे सकते हैं त्यागपत्र

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 20 सितंबर । पंजाब की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के विधायक कुलजीत सिंह नागरा ने केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पास कराए गए तीन कृषि बिलों के विरोध में आज त्याग-पत्र दे दिया। उन्होंने विधानसभा को लिखे एक पत्र में कहा है कि उन्हें केंद्र के इन बिलों से गहरी चोट लगी है। ये बिल पंजाब के खेती भाईचारे को समाप्त करने के प्रयास हैं, इसलिए वे विधायक पद से इस्तीफा दे रहे हैं और किसानों के साथ उनके संघर्ष में शामिल होने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि नवम्बर 2016 में भी कांग्रेस के 42 विधायकों ने सतलुज लिंक नहर मामले को लेकर अपने-अपने इस्तीफे दे दिए थे। तब पंजाब में कांग्रेस विपक्ष में थी। अब कांग्रेस ने इन तीनों बिलों का विरोध किया है। उसका कहना है कि तीन कृषि बिलों का मामला लिंक नहर से छोटा नहीं है। हालांकि अभी यह तय नहीं है, परन्तु कांग्रेस से संकेत मिले हैं कि पार्टी की पंजाब इकाई इस सन्दर्भ में शीघ्र एक बैठक कर कोई निर्णय ले सकती है। विधायक कुलजीत सिंह नागरा के त्यागपत्र के बाद अन्य कांग्रेसी विधायकों द्वारा भी इस्तीफे देने के संकेत मिल रहे हैं। इधर अकाली नेताओं ने अब कांग्रेस पर प्रश्न करने शुरू कर दिए हैं। अकाली नेता दिलबाग सिंह विर्क की टिप्पणी थी कि कृषि बिलों के विरोध में हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद की कुरबानी दे दी है, अब पंजाब सरकार इस्तीफा देने में देरी क्यों कर रही है।
चीन द्वारा यथास्थिति में एकतरफा बदलाव का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य होगा :राजनाथ सिंह

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Antim Pravakta

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