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Home›News›राफेल सौदा : राजनीतिक दोषारोपण से लेकर राफेल के भारतीय धरती पर उतरने तक का सफर

राफेल सौदा : राजनीतिक दोषारोपण से लेकर राफेल के भारतीय धरती पर उतरने तक का सफर

By Antim Pravakta
July 30, 2020
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अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली, 30 जुलाई। भारतीय धरती पर बुधवार को पांच राफेल लड़ाकू विमानों के उतरने के साथ ही इस मुद्दे पर सालों से चल रही राजनीतिक रस्साकशी पर विराम लग गया। सत्तारूढ़ भाजपा ने जहां इस सौदे को राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करने वाला बताया था तो वहीं कांग्रेस ने इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। हालांकि सौदे को उच्चतम न्यायालय की ओर से क्लीन चिट दिये जाने के बाद इसकी खरीद में अवरोध समाप्त हो गया था। अंबाला वायु सेना केंद्र में बुधवार को लड़ाकू विमानों के पहुंचने पर भाजपा के कई नेता उत्साहित दिखे लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की लंबी लड़ाई के बाद यह दिन आया है। सौदे के आलोचकों ने इसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी और वहां हार गये थे। उच्चतम न्यायालय ने 59 हजार करोड़ रुपये में 36 लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं को दिसंबर 2018 में खारिज कर दिया और कहा था कि उसे इसमें कुछ गलत नजर नहीं आया। हालांकि इसके बाद भी राजनीतिक दोषारोपण का दौर जारी रहा। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में, राफेल सौदे में रिश्वत के आरोप लगाये थे और इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा ने विपक्ष पर भ्रष्टाचार के बेबुनियाद आरोप लगाकर देशहित से समझौता करने का इल्जाम लगाया और कहा कि फ्रांसीसी विमान भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को कई गुना बढ़ाएंगे। अधिकतर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी के आरोप मतदाताओं को अपनी ओर नहीं खींच सके और भाजपा नीत राजग अधिक बड़े जनादेश के साथ केंद्र में वापस आया। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ जैसे नारे चुनाव में कांग्रेस की पराजय के साथ उसके लिए प्रतिकूल साबित हुए। राजग सरकार ने फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 23 सितंबर, 2016 को 59 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया था। इससे पहले भारतीय वायु सेना के लिए 126 मध्यम बहुभूमिका वाले लड़ाकू विमान खरीदने की करीब सात साल की कवायद कांग्रेस नीत संप्रग सरकार में सफल नहीं हुई थी। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर प्रक्रिया की अनदेखी करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विमानों की जो कीमत संप्रग सरकार के समय तय की गयी थी, उससे बहुत अधिक दाम चुकाये जा रहे हैं। तत्कालीन रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने संसद में कांग्रेस के प्रदर्शनों के बीच कहा था कि वास्तव में मोदी सरकार ने जो सौदा किया है, वह संप्रग के समय किये गये करार से 20 फीसद सस्ता है। हालांकि सरकार ने सौदे की कीमत का ब्योरा देने से इनकार करते हुए कहा कि विमान की सुरक्षा विशेषताओं को सार्वजनिक करना राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता होगा। पिछले साल फरवरी में कैग की एक रिपोर्ट में भी व्यापक तौर पर सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा गया था कि संप्रग सरकार के समय विमान की जिस कीमत पर चर्चा हुई थी, राजग ने उससे 2.86 प्रतिशत सस्ती दर पर सौदा किया है। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने 14 दिसंबर, 2018 को सौदे की जांच की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि राफेल की खरीद में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने की कोई गुंजाइश नहीं है। अदालत ने पिछले साल नवंबर में अपने फैसले पर पुनर्विचार की याचिकाओं को खारिज करते हुए सौदे को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर विराम लगा दिया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने डीसीजीआई को रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब का समान वितरण सुनिश्चित करने को कहा

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली, 30 जुलाई । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को ‘रेमडेसिविर’ और ‘टोसिलिजुमैब’ दवा का समान वितरण सुनिश्चित करने को कहा है। इन दोनों दवाओं को देश के लिए तैयार कोविड-19 उपचार प्रोटोकॉल में ‘संभावित इलाज पद्धति’ के तौर पर शामिल किया गया है। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इसकी उपलब्धता विषम नहीं हो और यह दवा केवल महानगरों तक सीमित नहीं हो। मंत्रालय ने डीसीजीआई को लिखे पत्र में यह पता लगाने को कहा कि कितने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ये दवाएं उपलब्ध हैं और कहां अभी इनकी आपूर्ति और वितरण संबंधित कंपनियों द्वारा नहीं किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा, ‘‘मुझे निर्देश मिला है कि कोविड-19 चिकित्सकीय प्रबंधन नियमावली के तहत संभावित इलाज पद्धति में शामिल रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब की उपलब्धता के अलावा इसके भौगोलिक वितरण तथा पहुंच की निगरानी की जाए।’’ मंत्रालय द्वारा 27 जुलाई को लिखे पत्र में कहा गया, ‘‘मंत्रालय को इस बात से अवगत कराया जाए कि कितने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक यह दवा पहुंच रही है और क्या ऐसा कोई राज्य है जो कंपनियों द्वारा संबंधित दवा की आपूर्ति और वितरण से छूट गया है।’’ गौरतलब है कि मंत्रालय ने कोविड-19 चिकित्सकीय प्रबंधन में रेमडेसिविर (केवल आपात स्थिति में) और टोसिलजुमैब (मध्यम श्रेणी के लक्षण आने पर) के इस्तेमाल को संभावित इलाज पद्धति के रूप में शामिल करने की अनुमति दी है। संभावित इलाज पद्धति में उन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जिनका इलाज में प्रभाव पुख्ता तौर पर प्रमाणित नहीं हुआ होता है।

अनलॉक-3 की गाइडलाइंस जारी, जिम खुलेंगे लेकिन स्कूल, मेट्रो, सिनेमाघरों पर पाबंदी जारी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली, 30 जुलाई । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनलॉक-3 के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी है। 5 अगस्त से जिम भी खोले जा सकेंगे। हालांकि, 31 अगस्त तक स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे। मेट्रो, सिनेमाघर, स्विमिंग पुल भी अभी नहीं खुलेंगे। कंटेनमेंट जोन्स में 31 अगस्त 2020 तक लॉकडाउन की पाबंदियों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक या मनोरंजन से जुड़े आयोजनों पर रोक जारी रहेगी, जिनमें भीड़ जुटती है। स्वतंत्रता दिवस समारोह को सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरे हेल्थ प्रोटोकॉल्स (जैसे मास्क पहनना) के साथ इजाजत दी गई है। कंटेनमेंट जोन्स में 31 अगस्त तक लॉकडाउन जारी रहेगा। इन जोन्स में सिर्फ जरूरी गतिविधियों को इजाजत रहेगी। गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के हिसाब से कंटेनमेंट जोन्स का फैसला डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटीज करेंगी। 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों, पहले से गंभीर बीमीरियों से जूझ रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं और 10 साल से कम उम्र के बच्चों को पहले की तरह ही घर में रहने की सलाह दी गई है। इन श्रेणी के लोगों को बहुत जरूरी होने या स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या पर ही घर से बाहर जाने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना अनिवार्य है। भीड़भाड़ वाले आयोजनों पर रोक जारी है। वैवाहिक कार्यक्रमों में 50 से ज्यादा मेहमानों की इजाजत नहीं है। इसी तरह अंतिम संस्कार में 20 लोगों से ज्यादा के शामिल होने पर रोक है। सार्वजनिक जगहों पर पान, गुटखा, तंबाकू खाना यदिल्ली के सीरो प्रीवलेंस अध्ययन में 23.48 प्रतिशत लोगों के कोविड-19 से प्रभावित होने का पता चला

ट्रैवल एजेंट के जरिए वंदे भारत उड़ानों की टिकट बुक करते समय लोग तय से ज्यादा किराया ना दें : सरकार

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली, 30 जुलाई । नागर विमानन मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि वंदे भारत मिशन के तहत संचालित हो रही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ट्रैवल एजेंट की मदद से टिकट बुक कराते वक्त कोई भी व्यक्ति एअर इंडिया की वेबसाइट पर दिए गए तय किराये से ज्यादा राशि का भुगतान न करे। कोरोना वायरस महामारी के कारण 23 मार्च से ही भारत में निर्धारित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं। लेकिन, विदेशों में फंसे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वंदे भारत मिशन के तहत एअर इंडिया छह मई से ही चार्टर्ड अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित कर रहा है। इस मिशन के तहत कुछ निजी कंपनियों के विमानों ने भी उड़ानें भरी हैं। मंत्रालय ने ट्वीट किया है, ‘‘वंदे भारत मिशन की उड़ानों पर ट्रैवल एजेंट के माध्यम से टिकट बुक रहे लोग, कृपया ध्यान दें, वे एअर इंडिया की वेबसाइट पर लिखे किराये से ज्यादा राशि का भुगतान ना करें। जिन यात्रियों को ट्रैवल एजेंट द्वारा ज्यादा राशि वसूले जाने की दिक्कत से दो-चार होना पड़ रहा है वे जीएमएसएम एट द रेट एअरइंडिया डॉट इन पर लिख सकते हैं।’’ भारत ने अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस के साथ 16 जुलाई को द्विपक्षीय ‘एयर बबल’ बनाया था जिसके तहत इन देशों के विमान सीधे भारत के शहरों से परिचालन कर सकेंगे और एअर इंडिया को भी यही सुविधा मिलेगी।

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