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Home›News›नई शिक्षा नीति का जोर रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वाला तैयार करना है : प्रधानमंत्री मोदी

नई शिक्षा नीति का जोर रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वाला तैयार करना है : प्रधानमंत्री मोदी

By Antim Pravakta
August 2, 2020
1999
0
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अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति का जोर रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वालों को तैयार करना है और देश में शिक्षा शिक्षा के प्रयोजन और विषय-वस्तु में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथन’ के फिनाले को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में घोषित नई शिक्षा नीति-2020 में अंतर-विषय अध्ययन पर जोर दिया गया है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि छात्र जो सीखना चाहता है पूरा ध्यान उसी पर हो। उन्होंने छात्रों से कहा कि गरीबों को बेहतर जीवन देने के लिए ‘जीवन की सुगमता’ का लक्ष्य हासिल करने में युवा वर्ग की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि हैकाथन के बारे में प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को ट्वीट किया था, ‘‘स्मार्ट इंडिया हैकाथन विचार करने और कुछ नया करने के एक जीवंत मंच के रूप में उभरा है। स्वाभाविक रूप से, इस बार हमारे युवा अपने नवाचारों में कोविड के बाद की दुनिया के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत बनाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे होंगे।’’ स्मार्ट इंडिया हैकाथन के 2017 में हुए पहले संस्करण में 42,000 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। यह संख्या 2018 में बढ़कर एक लाख और 2019 में बढ़कर दो लाख हो गई थी। स्मार्ट इंडिया हैकाथन 2020 के पहले दौर में साढ़े चार लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।

भारतीय भाषा, संस्कृति में तिलक का विश्वास नई शिक्षा नीति में झलकता है : अमित शाह

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का विश्वास हाल ही में जारी नई शिक्षा नीति में झलकता है। ‘लोकमान्य तिलक- स्वराज से आत्मनिर्भर भारत तक’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के
दृष्टिकोण के माध्यम से तिलक के विचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में भारत, भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं के तिलक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। शाह ने कहा, ‘‘भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति में लोकमान्य तिलक का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की नई शिक्षा नीति में झलकता है।’’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति, 2020 को मंजूरी दी थी जिसमें स्कूली और उच्च शिक्षा में आमूल-चूल बदलाव के प्रावधान हैं। लोकमान्य तिलक की सौवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने यहां वेबिनार का आयोजन किया। शाह ने कहा कि तिलक का प्रसिद्ध सूत्रवाक्य था कि सच्चे राष्ट्रवाद की बुनियाद संस्कृति और परंपराओं की आधारशिलाओं पर रखी होती है। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी सुधार यदि हमारे अतीत की अनदेखी करता है या उसका अपमान करता है तो सच्चे राष्ट्रवाद को समझने में मदद नहीं मिल सकती।’’ गृह मंत्री ने कहा कि तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को सच्चे अर्थों में पूर्णता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई थी और इसमें बेजोड़ योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि तिलक का यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा ‘‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे पाकर रहूंगा।’’ शाह ने कहा कि तिलक के इस नारे ने भारतीय समाज में जागरण किया और स्वतंत्रता संघर्ष को जन आंदोलन बना दिया जिसकी वजह से उनका नाम लोकमान्य तिलक पड़ गया। उन्होंने कहा कि भारत और भारतीय संस्कृति के गौरवपूर्ण इतिहास को जानना है तो तिलक के लेखन को समझना होगा। उनकी साहित्यिक कृतियों को पढ़ने से युवाओं को उनके महान व्यक्तित्व का ज्ञान होगा। कामकाजी वर्ग को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में तिलक के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि तिलक ने लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने के लिए शिवाजी जयंती और गणेशोत्सव मनाना शुरू किया था जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा ही बदल दी।

राजकोषीय घाटा में जून अंत तक बजट पहुंचा अनुमान के 83.2 प्रतिशत पर

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही बजट अनुमान के 83.2 प्रतिशत यानी 6.62 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण कोरोना वायरस महामारी तथा लॉकडाउन के कारण कर-संग्रह में कमी आना है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान पहली तिमाही के अंत में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 61.4 प्रतिशत पर था। फरवरी में पेश 2020-21 के आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 7.96 लाख करोड़ रुपए यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत रखा था। हालांकि, इन आंकड़ों को कोविड-19 संकट से उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों के मद्देनजर संशोधित किया जा सकता है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत में राजकोषीय घाटा 6,62,363 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गया था, जो सात साल का उच्च स्तर था। यह मुख्य रूप से राजस्व संग्रह में कमी के कारण था। सीजीए के आंकड़ों के अनुसार, सरकार की राजस्व प्राप्ति 150008 करोड़ रुपए यानी बजट अनुमानों का 7.4 प्रतिशत रही। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 14.5 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों के दौरान कर से प्राप्त राजस्व 134822 करोड़ रुपए यानी बजट अनुमान का 8.2 प्रतिशत रहा। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान कर राजस्व अनुमान 15.2 प्रतिशत था। सरकार की कुल प्राप्तियां बजट अनुमान का 6.8 प्रतिशत यानी 153581 करोड़ रुपए है। केंद्र सरकार की जीएसटी की भरपाई की बाध्यता उधार लेने का दबाव बजट में, सरकार ने कुल प्राप्तियों का अनुमान 22.45 लाख करोड़ रुपए लगाया था। जून के अंत तक सरकार का कुल खर्च 8,15,944 लाख करोड़ रुपए यानी बजट अनुमान का 26.8 प्रतिशत रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान कुल खर्च 25.9 प्रतिशत था। आंकड़ों से पता चला है कि 134043 करोड़ रुपए राज्य सरकारों को जून तक केंद्र सरकार द्वारा करों के हिस्से के रूप में हस्तांतरित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14588 करोड़ रुपए कम है।

जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, नागालैंड, उत्तराखंड ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना में शामिल हुए : पासवान

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, नागालैंड और उत्तराखंड भी ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना में शामिल हो गए हैं। इनके साथ इस योजना में शामिहोने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 24 हो गई है। उन्होंने कहा कि इसके साथ अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आने वाले कुल लाभार्थियों में 80 प्रतिशत या लगभग 65 करोड़ लाभार्थी इन 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कहीं से भी सब्सिडी वाला राशन ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मार्च 2021 तक इस योजना के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा। ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना के तहत पात्र लाभार्थी राशन कार्ड का इस्तेमाल करके देश के किसी भी सरकारी राशन की दुकान से एनएफएसए के तहत अपना खाद्यान्न ले सकते हैं। पासवान ने कहा, ‘‘खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, नागालैंड और उत्तराखंड की तकनीकी तत्परता को ध्यान में रखते हुए, इन चार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के लिए मौजूदा 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ जोड़ा है।’’ उन्होंने एक बयान में कहा कि इसके साथ अब ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना के तहत 24 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जुड़े हुए हैं।

है।

जीएसटी संग्रह जुलाई में कम होकर 87,422 करोड़ रुपये पर आया

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त जुलाई महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह जून के 90,917 करोड़ रुपये से घट कर 87,422 करोड़ रुपये पर आ गया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में शनिवार को इसकी जानकारी दी। हालांकि, जुलाई का संग्रह मई के 62,009 करोड़ रुपये और अप्रैल के 32,294 करोड़ रुपये से अधिक है। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, ‘‘जुलाई 2020 में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 87,422 करोड़ रुपये रहा, जिसमें केंद्रीय जीएसटी 16,147 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 21,418 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी 42,592 करोड़ रुपये रहा। एकीकृत जीएसटी में वस्तुओं के आयात पर संग्रहीत 20,324 करोड़ रुपये कर शामिल है। मास के दौरान उपकर से 7,265 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।’’ जुलाई में जीएसटी से प्राप्त राजस्व साल भर पहले के समान माह की तुलना में 86 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा कि हालांकि जुलाई का जीएसटी संग्रह जून की तुलना में अधिक है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जून में बड़ी संख्या में करदाताओं ने फरवरी, मार्च और अप्रैल 2020 से संबंधित करों का भुगतान किया था। करदाताओं को कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर फरवरी, मार्च और अप्रैल में जीएसटी भुगतान से राहत प्रदान की गयी थी। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले करदाताओं को सितंबर 2020 तक रिटर्न दायर करने की मोहलत है।

देश में 5 साल में 11 लाख करोड़ रुपये के फोन बनाने के लिए कंपनियों की लाइन : प्रसाद

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त सैमसंग, लावा, डिक्सन और एप्पल के लिए ठेके पर काम करने वाली इकाइयों सहित देश विदेशी की करीब 22 घरेलू और अंतराष्ट्रीय कंपनियों ने देश में पांच साल में 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन हैंडसेट के विनिर्माण के प्रस्ताव पेश किए हैं। केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शनिवार को यह जानकारी दी। प्रसाद ने कहा कि सरकार की 41,000 करोड़ रुपये की उत्पादन से सम्बद्ध प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत कराये हैं। इससे देश में करीब 12 लाख रोजगार अवसरों का सृजन होगा। इनमें तीन लाख प्रत्यक्ष तथा नौ लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर होंगे। प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इनमें करीब 11 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल विनिर्माण करने, करीब सात लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात करने के प्रस्ताव हैं। इससे करीब तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष और नौ लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मैं आवेदन करने वाली कंपनियों का निजी तौर पर शुक्रिया अदा करता हूं।’’ उन्होंने कहा कि पीएलआई के तहत कुल 22 कंपनियों ने आवेदन किया है। इसमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की कंपनियां शामिल है। प्रसाद ने कहा कि इस योजना के तहत प्रस्ताव जमा कराने वाली विदेशी कंपनियों में सैमसंग, फॉक्सकॉन होन हेई, राइजिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन शामिल हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए इन विदेशी कंपनियों के लिए 15,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के मोबाइल फोन विनिर्माण की शर्त रखी गयी थी। भारतीय मोबाइल फोन विनिर्माता कंपनियों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है। फॉक्सकॉन होन हेई, विस्ट्रॉन तथा पेगाट्रॉन अनुबंध पर एप्पल आईफोन का विनिर्माण करती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक मोबाइल फोन की वैश्विक बिक्री में एप्पल की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और सैमसंग की 22 प्रतिशत है। पीएलआई योजना से देश में मोबाइल फोन का विनिर्माण कई गुणा बढ़ने की उम्मीद है। प्रसाद ने कहा कि आवेदन स्वीकार होने के बाद ये कंपनियां कई हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। उन्होंने कहा कि लावा, डिक्सन टेक्नोलॉजीस, भगवती (माइक्रोमैक्स), पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स, सोजो मैन्युफक्चरिंग सर्विसेस और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी भारतीय कंपनियों ने भी पीएलआई के तहत आवेदन किया है। जबकि 10 अन्य कंपनियों ने विशेषीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे श्रेणी के तहत आवेदन किया है। ये प्रस्ताव करीब 45,000 करोड़ रुपये के हैं। इनमें आवेदन करने वाली प्रमुख कंपनियों में एटीएंडएस, एसेंट सर्किट्स, विजिकॉन, वालसिन, सहस्रा, विटेस्को और नियोलिंक शामिल हैं। इस योजना के तहत किसी भी चीनी कंपनी ने आवेदन नहीं किया है। प्रसाद ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश की कंपनियों के निवेश का विरोध नहीं करता है। लेकिन कंपनियों को अनुमति पाने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। सरकार को इससे एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री रविशंकरः मीडिया से भारत में विनिर्माण की बात को किया साझा

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त आज नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सरकार को देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन प्रोत्साहन योजना से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने भारत में विनिर्माण को तेज करने के लिए एप्पल और सैमसंग सहित वैश्विक मोबाइल विनिर्माण दिग्गजों को आमंत्रित किया। मंत्री ने देश में व्यापार करने में आसानी, मजबूत और लोकप्रिय रूप से चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार, कुशल और अर्ध-कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता और एक विशाल घरेलू बाजार की क्षमता सहित प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इन मजबूत विशेषताओं के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में विश्व के नेता के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। श्री प्रसाद ने बताया कि 22 कंपनियों ने देश में विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन किया है, इसके अलावा 40 अन्य लोगों ने घटक विनिर्माण के लिए आवेदन किया है। मंत्री ने देश में एक गहरी आपूर्ति श्रृंखला के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इन विनिर्माण के कारण घरेलू मूल्य वृद्धि 20 प्रतिशत से लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण इकाइयां बहुत कम समय में 6 करोड़ से बढ़कर लगभग 33 करोड़ हो गई हैं। प्रसाद ने कहा, इस क्षेत्र से देश में 3 लाख प्रत्यक्ष और 9 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।

सुमित देव बने एनएमडीसी के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त । सरकारी कंपनी एनएमडीसी ने शनिवार को कहा कि सुमित देव ने चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का पदभार संभाल लिया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि देव शुक्रवार को सेवानिवृत्त हुए एन बैजेंद्र कुमार की जगह लेंगे। कंपनी ने कहा, ‘‘सुमित देव ने एक अगस्त 2020 से एनएमडीसी के सीएमडी का पदभार संभाल लिया है।’’ इससे पहले देव कंपनी के निदेशक (कार्मिक) थे। उन्होंने भुवनेश्वर स्थित ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी से मेकानिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। वह 2015 में एनएमडीसी के साथ महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) के तौर पर जुड़े और बाद में उन्हें पदोन्नत कर कार्यकारी निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) बनाया गया। वह 2019 में निदेशक (कार्मिक) बने। एनएमडीसी के साथ जुड़ने से पहले वह इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाली एक अन्य सरकारी कंपनी राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में कार्यरत थे। वह प्रबंधन प्रशिक्षु के तौर पर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के साथ जुड़े थे और वहां 25 साल काम किया था। एनएमडीसी ने कहा, ‘‘देव के पास मानव श्रमबल, प्रशिक्षण व विकास और अन्य मानव संसाधन कार्यों में विस्तृत अनुभव है। उनके पास इस्पात व लौह अयस्क, स्पंज आयरन, छर्रों और हीरे के विपणन तथा वितरण का भी अनुभव है।’’

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में वित्त निदेशक की नियुक्ति

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त नवरत्न कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (भेल) ने शनिवार को बताया कि उसने दिनेश कुमार बत्रा को वित्त निदेशक नियुक्त किया है। भेल ने एक बयान में कहा कि बत्रा ने 1984 में भेल के गाजियाबाद इकाई से भेल में करियर शुरू किया था। साढ़े तीन दशक के करियर में उन्होंने दिल्ली, पुणे और बेंगलुरु की विभिन्न इकाइयों में सेवाएं दीं। बयान में कहा गया है कि उन्होंने इससे पहले महाप्रबंधक के रूप में भेल के कॉरपोरेट कार्यालय, दिल्ली और पुणे के क्षेत्रीय कार्यालयों में आंतरिक ऑडिट का नेतृत्व किया। वह कानपुर की हारकोर्ट बटलर टेकनिकल यूनिवर्सिटी (एवबीटीयू), भारतीय विदेश व्यपार संस्थान (दिल्ली)और मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट (गुड़गांव) में पढ़े हुए हैं।
पीसीए के दायरे से बाहर आने को तैयार है यूको बैंक : अधिकारी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त सार्वजनिक क्षेत्र के यूको बैंक ने लगातार दो तिमाहियों में शुद्ध लाभ दर्ज किया है। अब यूको बैंक रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) व्यवस्था से बाहर आने को तैयार है। बैंक के एक अधिकारी ने शनिवार को यह बात कही। केंद्रीय बैंक ने गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के ऊंचे स्तर तथा संपत्तियों पर नकारात्मक रिटर्न की वजह से मई, 2017 में बैंक को पीसीए के तहत डाला था। अधिकारी ने कहा, ‘‘हम रिजर्व बैंक से पीसीए ढांचे से बाहर निकलने के लिए संपर्क करने की तैयारी में हैं। बैंक ने लगातार दो तिमाहियों में शुद्ध लाभ कमाया है। ‘‘उन्होंने कहा कि 30 जून तक बैंक का एनपीए तथा पूंजी पर्याप्तता अनुपात का स्तर उसे पीसीए के दायरे से बाहर लाने का पात्र बनाता है। जून में समाप्त तिमाही में यूको बैंक का शुद्ध एपीए घटकर 4.95 प्रतिशत रह गया। इस दौरान पूंजी पर्याप्तता अनुपात 11.65 प्रतिशत रहा। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंक ने 21.46 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है।
राम मंदिर का निर्माण देश की अस्मिता से जुड़ा है : भैय्याजी जोशी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने शनिवार को कहा कि देश में अनेक ‘‘आक्रांता’’ आए और अपने चिन्ह छोड़ गए जिन्हें देखकर ‘‘वेदना’’ होती है तथा ऐसे में राम मंदिर का बनना ‘‘राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक’’ है। जोशी ने कहा, ‘‘अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण केवल आस्था के एक केंद्र या एक और मंदिर की स्थापना नहीं बल्कि देश की अस्मिता और मानव कल्याण से जुड़ा विषय है।’’ जोशी श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के विषय पर अशोक सिंघल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा, ‘‘देश में अनेक आक्रांता आए और वे अपने चिन्हों को छोड़ गए । उन चिन्हों देखकर वेदना होती है। ऐसा महसूस होता है कि क्या यह देश हमेशा आक्रांताओं से संघर्ष ही करता रहेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ राम मंदिर का बनना राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। ‘‘ संघ के सरकार्यवाह ने कहा, ‘‘ अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल एक मंदिर की स्थापना नहीं है। देश में भगवार राम के हजारों मंदिर हैं । इन मंदिरों की श्रृंखला में एक और मंदिर बन जाए, यही केवल अयोध्या आंदोलन का भाव नहीं रहा। ‘‘ उन्होंने कहा कि इस मंदिर के संदर्भ में भिन्न दृष्टि से देखने और भगवान राम के जीवन को महसूस करने की जरूरत है जो अनुकरणीय आदर्श हैं । आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण एक नये परिवर्तन की शुरूआत है।

लॉकडाउन लागू होने के बाद से सबसे कम स्तर 2.15 प्रतिशत पर कोविड-19 मृत्यु दर : स्वास्थ्य मंत्रालय

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त देश में कोविड-19 से अब तक संक्रमण मुक्त हुए लोगों की संख्या बढ़ कर 11 लाख पहुंच गई है, वहीं इस महामारी से होने वाली मृत्यु की दर मध्य जून के 3.33 प्रतिशत से बेहतर हो कर अब 2.15 प्रतिशत रह गयी है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि मार्च में लॉकडाउन का प्रथम चरण लागू किये जाने के बाद से देश में कोविड-19 की मृत्यु दर पहली बार इतनी कम हुई है। मंत्रालय ने कहा कि कि दुनिया भर में भारत अभी भी कोविड-19 मृत्यु दर को सबसे कम स्तर पर बनाए हुए है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यह केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की समन्वित, सक्रिय, क्रमिक और ‘‘जांच, संक्रमित मरीज के संपर्क में आये व्यक्ति का पता लगाना, उपचार करना’’ की रणनीति एवं कोशिशों को बयां करता है। मंत्रालय द्वारा शनिवार सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 36,569 और मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के साथ ही देश में इलाज के बाद अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त हुए लोगों की संख्या बढ़कर 10,94,374 हो गई है। देश में फिलहाल 5,65,103 संक्रमित मरीज इलाजरत हैं। मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में कोविड-19 मरीजों के संक्रमण मुक्त होने की दर पहले से बेहतर होकर 64.53 प्रतिशत हो गई है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘तेजी से जांच करके संक्रमण का शुरुआती दौर में पता लगाने, अस्पतालों में भर्ती लोगों का समयबद्ध और प्रभावी उपचार होने से मृत्यु दर में लगातार कमी आ रही है। यह इस बारे में संकेत है कि भारत कोविड-19 मृत्यु दर को नियंत्रित करने में सफल रहा है।’’ स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि जब मृत्यु दर को कम कर लिया गया है, ऐसे में संक्रमण को नियंत्रित करने की प्रभावी रणनीति का सफल क्रियान्वयन, तेजी से जांच, अस्पतालों में उचित इलाज से एक दिन में अब 30,000 से ज्यादा मरीज संक्रमण मुक्त हो रहे हैं। देश में शनिवार को एक दिन में कोविड-19 के सर्वाधिक 57,118 मामले सामने आने के बाद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 16,95,988 हो गए, जबकि स्वस्थ होने वालों की संख्या भी बढ़कर 10,94,374 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में 764 लोगों की मौत होने के साथ इस महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़ कर 36,511 हो गई है।
दाहेज बॉयलर घटनाः विस्थापित लोगों को मुआवजा देने के आदेश की समीक्षा संबंधी याचिका खारिज

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त गुजरात के भरूच जिले के दाहेज में तीन जून को बॉयलर फटने से भीषण आग लगने और आठ कर्मचारियों की मौत होने के बाद विस्थापित हुए लोगों को मुआवजा देने के अपने आदेश की समीक्षा करने संबंधी याचिका को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने खारिज कर दिया है। याचिका एक कंपनी द्वारा दायर की गई थी। एनजीटी ने यशस्वी नारायण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर आठ जून को 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और विस्थापित हुए प्रत्येक व्यक्ति को 25,000 रुपये देने को कहा था। एनजीटी ने कहा कि आदेश की समीक्षा करने की कंपनी की याचिका का कोई आधार नहीं है। अधिकरण ने कहा कि आदेश केवल मीडिया की खबरों पर आधारित नहीं था बल्कि सभी पक्षों को सुनने के बाद दिया गया था। पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता को अवसर दिए जाने के बाद दिए गए आदेश में उल्लिखित तथ्यों पर कोई विवाद नहीं था। यह गलत स्थापना दी गई कि आदेश केवल मीडिया की खबरों पर आधारित था। आदेश प्राथमिक तौर पर तथ्यों की जांच करने और याचिकाकर्ता को नोटिस दिए जाने के बाद दिया गया था।’ अधिकरण ने कहा कि घटना दिन में 12 बजे हुई थी और देर रात तक कम से कम 10 से 12 घंटे तक विस्थापन होता रहा। एनजीटी ने कहा, ‘इस दौरान प्रभावित लोगों को तनाव, विस्थापन और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। यह कहना गलत है कि उन्हें मुआवजा नहीं मिलना चाहिए और ऐसे विस्थापन से शारीरिक या मानसिक तौर पर कोई नुकसान नहीं होता।’ अधिकरण ने कहा कि कंपनी द्वारा दायर की गई याचिका बेतुकी है।
गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी से राजस्थान में चल रहे तमाशे को बंद करने की अपील

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के बागियों पर सॉफ्ट होते नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपने एक ताजे बयान में कहा है कि जो लोग सरकार गिराने की साजिश में लगे थे अगर वह आलाकमान के पास जाते हैं और आलाकमान उन्हें माफ कर देता है तो मैं उन्हें गले लगा लूंगा। मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है तीन बार मुख्यमंत्री था प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष रहा मैं जो भी कर रहा हूं पार्टी और जनता की सेवा के लिए कर रहा हूं मेरा इसमें अपना कुछ भी नहीं है। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि बीजेपी चुनी हुई सरकारों को गिराने के खेल में लगी है और लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें यह सब करना पड़ रहा है। यह सब करते हुए हमें अच्छा नहीं लगता है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री को दो बार मौका दिया लोगों ने लेकिन उन्होंने थाली बजवाई, ताली बजवाई, बेल बजवाई, मोमबत्ती जलवाई, लोगों ने उनकी बात पर विश्वास किया। ये बहुत बड़ी बात है इसलिए प्रधानमंत्री को चाहिए कि राजस्थान में जो तमाशा चल रहा है उसे बंद करवाएं। यहां पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की रेट बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखूंगा कि उन्हें कोरोना के बढ़ते हुए मामलों पर देश के बाकी मुख्यमंत्रियों के साथ एक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करनी चाहिए। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर राज्य की सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमित शाह हर वक्त सरकार गिराने के बारे में सोचते हैं। सीएम गहलोत ने कहा, ‘अमित शाह का नाम मैं बार-बार इसलिए लेता हूं कि फोरफ्रंट पर वो ही आते हैं. कर्नाटक के लिए भी, एमपी के लिए भी, गोवा हो, मणिपुर हो, अरुणाचल प्रदेश हो, तो मजबूरी में कहना पड़ता है कि अमित शाह जी आपको क्या हो गया है? आप रात-दिन, जागते-सोते हर वक्त सोचते हो किस तरह मैं गवर्नमेंट को गिराऊं।’ जैसलमेर जाने वाले अशोक गहलोत गुट के 2 विधायकों की तबीयत खराब हो जाने की वजह से शनिवार को सूर्यगढ़ फोर्ट में डॉक्टर को बुलाना पड़ा। जैसलमेर में दोपहर 12ः00 बजे तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया था। ऐसे में कहा जा रहा है कि कई विधायकों को घबराहट महसूस हो रही है।
किसानों की मांग न मानी गई तो तीव्र होगा दूध आंदोलन : देवेंद्र फडणवीस

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर दूध उत्पादक किसानों की मांग नहीं मानी गई तो दूध आंदोलन और तेज किया जाएगा। फडणवीस ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि आज दूध उत्पादक किसानों की मांगों के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राज्यव्यापी आंदोलन किया है। दूध उत्पादक किसानों की मुख्य मांगों में दूध को प्रतिलीटर 10 रुपये अनुदान दिया जाना व दूध पावडर को प्रति किलो 50 रुपये अनुदान दिए जाने की मांग शामिल है। वहीं आज के आंदोलन में भाजपा, रयत क्रांति, रासप, रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया आदि शामिल हुई थी। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन की शुरुआत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटील, विधानपरिषद के नेता प्रतिपक्ष प्रवीण दरेकर, हरिभाऊ बागडे, पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, गिरीश महाजन, राधाकृष्ण विखे, सदाभाऊ खोत, महादेव जानकर आदि ने विभिन्न जिलों में किया है। आज के आंदोलन में भाजपा के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल रहे हैं।
राम मंदिर का भूमि पूजन देश के लिए एक गौरवशाली क्षण : डॉ. सुरेन्द्र जैन

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि राम मंदिर का भूमि पूजन देश के लिए एक गौरवशाली क्षण है। इस राष्ट्रीय गौरव को कोई धूमिल नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए हिंदू समाज ने निरंतर संघर्ष किए हैं। 1984 से प्रारंभ हुए वर्तमान संघर्ष में तीन लाख से अधिक गांवों की सहभागिता के साथ 16 करोड़ राम भक्तों ने भाग लिया। 9 नवम्बर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय देने तक यह संघर्ष निरंतर चलता रहा। इस अद्वितीय अभियान का ही परिणाम है कि भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए साकार हो रहा है। नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. जैन ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास देश को ‘आत्मग्लानि से आत्मविश्वास की ओर’ जाने वाली एक अद्भुत गौरव यात्रा है। लगभग 1000 वर्षों तक विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध चले निरंतर संघर्ष के बाद हमने विजय प्राप्त की थी, परंतु छद्म धर्म-निरपेक्षता की विभाजनकारी राजनीति ने देश के स्वाभिमान को कुंठित करने का प्रयास निरंतर किया। हिंदू समाज को न केवल काल्पनिक आधारों पर बांटा जा रहा था अपितु हिंदुओं में एक हीन भावना का निर्माण भी किया जा रहा था। इस आंदोलन ने विभाजन की सभी रेखाओं को समाप्त कर दिया है। जाति, पंथ, भाषा, क्षेत्र आदि से ऊपर उठकर हिंदू संगठित हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रीय गौरव के परिणाम स्वरूप भारत में विभाजनकारी राजनीति जीवन के सभी क्षेत्रों से लुप्त होती जा रही है। संपूर्ण देश अब आत्मविश्वास से परिपूर्ण होकर हर क्षेत्र में कल्याणकारी परिवर्तन ला रहा है। साथ ही भारत वैश्विक मंच पर एक महाशक्ति के रूप में पदार्पण कर रहा है। विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ जैन ने कहा कि इस कल्याणकारी परिवर्तन की गति तेज होती जा रही है। भगवान राम के मंदिर का शीर्ष कलश स्थापित होने तक सभी विभाजनकारी तत्व पूर्ण रूप से निरर्थक व निष्तेज हो जाएंगे और आत्म गौरव स्वाभिमान एवं आत्मविश्वास से युक्त एक नए भारत का संकल्प साकार होगा।
मुख्यमंत्री गहलोत ने बेटी-दामाद को करोड़ों रुपये का पहुंचाया अवैध फायदा : केन्द्रीय राज्य मंत्री चौधरी
-मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से की नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त राजस्थान में सियासी उठापटक के बीच पार्टियों और नेताओं की ओर से एक दूसरे पर राजनीतिक हमलों का दौर जारी है। शनिवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। उन्होंने गहलोत पर सियासी शक्ति का बेजा इस्तेमाल करते हुए अपनी बेटी और दामाद को अवैध रूप से करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। राज्य मंत्री चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगते हुए पूछा कि आपके झूठे गांधीवादी कुर्ते में छिपी कालेधन की बड़ी जेब राजस्थान की जनता की मेहनत की कमाई को क्यों लूट रही है? उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय के पास आई शिकायत के अनुसार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने संवैधानिक पद की शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने की मंशा से राजस्थान के राजस्व में मुनाफा देने वाली चुनिंदा एजेंसीज में से एक राजस्थान वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के तहत भंडारण के टेंडर में जान-बूझकर ऐसी शर्तें डालीं, जिसमें राजस्थान की केवल एकमात्र कम्पनी भाग ले पाई। तकरीबन 2000 करोड़ रुपये के टेंडर का फायदा लेने वाली कल्पतरू ग्रुप की इस कंपनी का नाम महाराष्ट्र में सेना की जमीन हथियाने के मामले में भी आ चुका है। मुम्बई के बेहद पॉश इलाके परेस में मौजूद फ्लैट नंबर 182 (तकरीबन कीमत 8 करोड़) का संबंध भी इसी कल्पतरू ग्रुप से है, जिसमें मुख्यमंत्री गहलोत की बेटी और दामाद रहते हैं। उन्होंने कहा कि कल्पतरू ग्रुप की एक कम्पनी शौरी कंस्ट्रक्शंस के 50 फीसदी शेयर मुख्यमंत्री गहलोत की पुत्री के नाम कर दिए और दामाद को कम्पनी का डायरेक्टर बना दिया गया। चौधरी ने मुख्यमंत्री गहलोत पर भृष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि धन मोह में उन्होंने अपनी पुत्री व दामाद की हिस्सेदारी वाली कम्पनी के पैरेंट ग्रुप को जयपुर के जलमहल की लगभग 2000 करोड़ की बेशकीमती जमीन को मात्र कुछ करोड़ में 99 साल की लीज पर देना और वेयर हाउसिंग का टेंडर देने के लिए इनके अनुकूल शर्तें रखना क्या राजस्थान की जनता के लिए अनुचित नहीं है? चौधरी ने कहा कि गहलोत को नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। अब उन्हें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। प्रदेश की जनता इस लूट के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
राखियों का धागा सैनिकों के लिए रक्षा कवच का काम करेगा : राजनाथ सिंह

-लेह-लद्दाख में तैनात सैनिकों के लिए उत्तराखंड की बनीं राखियां रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भेंट

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त अगस्त (वेबवार्ता)। उत्तराखंड युद्ध स्मारक शौर्य स्थल के अध्यक्ष तरुण विजय ने आज नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों द्वारा हस्तनिर्मित राखियां लद्दाख एवं अन्य सीमावर्ती मोर्चों पर तैनात वीर सैनिकों के लिए प्रदान कीं। ये राखियां सेना द्वारा मोर्चों पर तैनात सैनिक भाइयों तक दो अगस्त तक पहुंच जाएंगी। तरुण विजय ने बताया कि प्रतिवर्ष वे देश के विभिन्न क्षेत्रों से राखियां एकत्र कर सैनिकों तक पहुंचाते हैं। इस कार्य में तमिलनाडु के स्वयंसेवकों और थिरूवल्लुवर के अनुयायियों द्वारा भी सहायता दी जाती है। हालांकि तमिलनाडु में राखी का त्योहार नहीं होता है। इस वर्ष कोरोना के कारण संख्या कुछ कम रही। 13 हजार राखियां तमिलनाडु से, पांच हजार उत्तराखंड से, आठ हजार दिल्ली सेवा भारती की बहनों द्वारा बना कर राजनाथ सिंह को दी गयीं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन राखियों का धागा सैनिकों के लिए रक्षा कवच का काम करेगा। इन बहनों का स्नेह हमारे सैनिकों का मनोबल बढ़ाएगा। यह स्नेह और शक्ति के धागे उनके लिए बहन की ओर से शत्रुओं को परास्त करने तथा स्वस्थ सुरक्षित घर लौटने का आशीर्वाद है।
जल्द ही देश में मिलेंगे सिर्फ ‘बीआईएस प्रमाणित’ हेलमेट, सरकार ने शुरू की प्रक्रिया

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली ए 01 अगस्त सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों को अधिक सुरक्षा के प्रयासों के तहत सरकार ने हेलमेट को अनिवार्य मानकीकरण के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश में केवल भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित हेलमेट का विनिर्माण और बिक्री ही हो सकेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों बीच घातक चोटों को कम करने की कोशिशों के तहत सरकार ने हेलमेट को अनिवार्य मानकीकरण के दायरे में लाने के प्रयास शुरू किए है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद देशभर में दोपहिया वाहन चालकों के लिए मात्र भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित हेलमेट का ही विनिर्माण और बिक्री की जाएगी। बयान के मुताबिक, ‘‘मंत्रालय ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए बनाए जाने वाले हेलमेट को भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम-2016 के तहत अनिवार्य प्रमाणन के मसौदा अधिसूचना तैयार की है।’’ मंत्रालय ने इस पर लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।Modi-2

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