धर्म मार्ग प्रवक्ता Archives - अंतिम प्रवक्ता http://www.antimpravakta.com/category/धर्म-मार्ग-प्रवक्ता/ News Agency in Delhi Mon, 12 Sep 2022 11:39:08 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई को हरी झंडी, हिंदू पक्ष के हक में कोर्ट का फैसला https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%83%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80/ https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%83%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80/#respond Mon, 12 Sep 2022 11:39:08 +0000 http://www.antimpravakta.com/?p=4163 अंतिम प्रवक्ता, 12 सितंबर (वाराणसी)। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में पांच महिलाओं की ओर से दाखिल वाद पर जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने वादी पक्ष की अपील स्वीकार करके प्रतिवादी पक्ष की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला सुनने योग्य है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। खास बात यह रही कि न्यायालय में फैसले के दौरान मुस्लिम पक्ष मौजूद नहीं रहा। अदालत का फैसला आते ही वादी पक्ष की महिलाओं के साथ अधिवक्ताओं ने भी खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे हिन्दू पक्ष की जीत माना […]

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अंतिम प्रवक्ता, 12 सितंबर (वाराणसी)। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में पांच महिलाओं की ओर से दाखिल वाद पर जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने वादी पक्ष की अपील स्वीकार करके प्रतिवादी पक्ष की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला सुनने योग्य है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

खास बात यह रही कि न्यायालय में फैसले के दौरान मुस्लिम पक्ष मौजूद नहीं रहा। अदालत का फैसला आते ही वादी पक्ष की महिलाओं के साथ अधिवक्ताओं ने भी खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे हिन्दू पक्ष की जीत माना है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि न्यायालय से एएसआई सर्वे और शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग भी करेंगे।

इसके पहले आज अपरान्ह एक बजे दोनों पक्षों के अधिवक्ता और वादी कुल 62 लोगों को अंदर मौजूद रहने की अनुमति मिली थी। प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने वाद को जनहित याचिका जैसा व प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट ज्ञानवापी को वक्फ संपत्ति समेत अन्य दलीलों के साथ मुकदमे को सुनने योग्य नहीं बताया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में आर्डर 7 रूल नंबर 11 के तहत आज वाद के पोषणीयता पर सुनवाई हुई।

पिछले वर्ष सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन की मांग को लेकर वादी राखी सिंह सहित पांच महिलाओं ने वाद दाखिल किया था। प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने प्रार्थनापत्र देकर वाद की पोषणीयता पर सवाल उठाया था। अदालत ने प्रतिवादी की अर्जी दरकिनार करते हुए सुनवाई की और ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराकर रिपोर्ट तलब कर ली। इसी दौरान प्रतिवादी पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला जज की अदालत में 26 मई से सुनवाई शुरू हुई।

प्रतिवादी की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 07 नियम 11 में मेरिट के तहत केस खारिज करके लिए कई तिथियों पर दलीलें दी गईं। इस मामले में वाराणसी कोर्ट में 24 अगस्त को दोनों पक्षों की बहस पूरी हो गई थी। जिला जज डॉ. एके विश्वेश ने 12 सितंबर तक फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरान वादी पक्ष की ओर से लिखित बहस भी दाखिल की गई और मुस्लिम पक्ष ने कई विवरण व पत्रावली कोर्ट में दिया। खास बात यह है कि पूर्व में हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष की ओर से केस की मेरिट की याचिका खारिज हो चुकी है।

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श्रीकृष्ण जन्मभूमि पुष्पांजलि कार्यक्रम में उमड़ी भक्तों की भीड़ https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%aa/ https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%aa/#respond Sat, 20 Aug 2022 02:21:36 +0000 http://www.antimpravakta.com/?p=4057 अंतिम प्रवक्ता, मथुरा, 19 अगस्त । मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लीलामंच पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या के राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष बाबा नृत्य गोपालदास महाराज के हाथों हुई। इस दौरान गुरु शरणानंद महाराज के साथ उन्होंने भगवान कृष्ण की आरती की। समारोह के दौरान केबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण भी मौजूद रहे। वह भी ठाकुर जी केशवदेव भगवान की आरती में शामिल हुईं और बाद में भजन गायन शुरू हुआ। स्थल पर आकर खुद को धन्य मान रहे गुरुशरणानंद महाराज ने कहा कि सौभाग्य से भगवान के जन्मोत्सव में […]

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अंतिम प्रवक्ता, मथुरा, 19 अगस्त । मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लीलामंच पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या के राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष बाबा नृत्य गोपालदास महाराज के हाथों हुई। इस दौरान गुरु शरणानंद महाराज के साथ उन्होंने भगवान कृष्ण की आरती की। समारोह के दौरान केबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण भी मौजूद रहे। वह भी ठाकुर जी केशवदेव भगवान की आरती में शामिल हुईं और बाद में भजन गायन शुरू हुआ। स्थल पर आकर खुद को धन्य मान रहे गुरुशरणानंद महाराज ने कहा कि सौभाग्य से भगवान के जन्मोत्सव में शामिल होने का मौका मिलता है। देवता भी आज खुश हो रहे होंगे।

जन-जन के आराध्य योगिराज श्रीकृष्ण के 5249वें जन्मोत्सव की खुशी ब्रज में छाई है। रात 12 बजे लाला का जन्म होगा। नटवर नागर के जन्मोत्सव का साक्षी बनने के लिए देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु मथुरा पहुंचे हैं। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ भी कान्हा की जन्मस्थली में पहुंचे हुए हैं। सुबह साढ़े पांच बजे से ठाकुर जी की मंगला आरती के दर्शन शहनाई और नगाड़ों के बीच हुआ। गर्भगृह के मूल स्वरूप में छेड़छाड़ किए बिना उसे प्राचीन कारागार का स्वरूप दिया गया है। सुबह आठ बजे भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूर्वान्ह ठाकुरजी को पुष्पांजलि दी गई। ठाकुरजी की आरती गई।

गुरु शरणानंद महाराज ने कहा कि सौभाग्य से भगवान के जन्मोत्सव में शामिल होने का मौका मिलता है। देवता भी आज खुश हो रहे होंगे। जन्म का महाभिषेक का कार्यक्रम रात 11 बजे से शुरू होगा। सारंग शोभा पुष्प बंगले में विराजमान होकर आराध्य दर्शन देंगे और श्रीहरिकांता पोशाक धारण करेंगे। ब्रज में जन्मोत्सव की धूम मची थी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान आस्था का केंद्र बन गया। सुबह से ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं की लाइन लग गई। भगवान की भक्ति में भक्त सुध-बुध खोए थे। मंच पर कलाकारों ने भगवान के भजन गाए। भजनों पर श्रद्धालु सुध-बुध खोकर झूम उठे। भगवान की भक्ति में रम गए और नाचते-गाते रहे। जन्मस्थान का नजारा अकल्पनीय हो गया। आस्था की धारा बह निकली।

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सावन का पहला सोमवार : कोरोना संकट काल में शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a8/ https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%ae%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a8/#respond Tue, 07 Jul 2020 07:29:05 +0000 http://www.antimpravakta.com/?p=3556 अंतिम प्रवक्ता, 06 जुलाई, 2020। सावन के पहले सोमवार पर काशी पुराधिपति की नगरी में पहली बार कंकर-कंकर शिवमय का नजारा नहीं दिखा। वैश्विक महामारी कोरोना संकट के चलते बाबा विश्वनाथ के दरबार में कांवड़ियों के बोलबम और हरहर महादेव का गगनभेदी उद्घोष नहीं गूंजा। फीके माहौल में अपेक्षाकृत बहुत कम शिवभक्तों ने मुंह पर मास्क लगाने के साथ शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर सैनिटाइज होने के बाद रेड कार्पेट पर चलकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। इस दौरान पूरे मंदिर परिक्षेत्र में सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया। एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी और दशाश्वमेध […]

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अंतिम प्रवक्ता, 06 जुलाई, 2020। सावन के पहले सोमवार पर काशी पुराधिपति की नगरी में पहली बार कंकर-कंकर शिवमय का नजारा नहीं दिखा। वैश्विक महामारी कोरोना संकट के चलते बाबा विश्वनाथ के दरबार में कांवड़ियों के बोलबम और हरहर महादेव का गगनभेदी उद्घोष नहीं गूंजा। फीके माहौल में अपेक्षाकृत बहुत कम शिवभक्तों ने मुंह पर मास्क लगाने के साथ शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर सैनिटाइज होने के बाद रेड कार्पेट पर चलकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। इस दौरान पूरे मंदिर परिक्षेत्र में सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया। एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी और दशाश्वमेध सीओ अवधेश पांडेय खुद फोर्स के साथ मंदिर परिक्षेत्र में चक्रमण करते दिखे। सावन के पहले सोमवार पर बाबा की एक झलक पाने के लिए शिवभक्त सुबह से ही कतार बद्ध होने लगे। उमस और गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह आसमान छू रहा था। चंहुओर ओर हर-हर महादेव का उद्घोष, बाबा के भक्तों का उनके प्रति प्रेम का भाव अपने आप महसूस हो रहा था। इसके पूर्व रात 3.30 पर बाबा की विधि विधान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य श्रृंगार मंगला आरती के बाद मंदिर का पट शिवभक्तों के लिए खुल गया। कोरोना के चलते मंदिर के तीनों प्रवेश द्वारों पर थर्मल स्कैनर से होकर शिव भक्तों को गुजरना पड़ रहा है। मंदिर में प्रवेश से पहले उन्हें सैनिटाइज कर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कराते हुए मंदिर में एक बार में केवल 5 ही लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है। शिव भक्तों को दरबार में बाबा का सिर्फ झांकी दर्शन ही मिल रहा है और स्पर्श दर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। सोमवार की सुबह 10 बजे तक जहां पहले 70 हजार से अधिक शिवभक्त दर्शन पूजन कर लेते थे, वहीं इस बार 1000 का आंकड़ा भी नहीं पार हो पाया। मंदिर जाने के लिए शिवभक्तों के लिए बने बैरिकेडिंग भी सूने नजर आये। इसके बावजूद सुरक्षा का तगड़ा इंतजाम रहा। कोरोना संकट के चलते स्थानीय लोगों ने घर में ही पूजा-पाठ रुद्राभिषेक किया। मंदिर में मैदागिन की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को गेट नंबर 4 के पांचों पांडव प्रवेश द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है जहां से श्रद्धालु रानी भवानी उत्तरी होते हुए गर्भ गृह के पूर्वी द्वार पर दर्शन कर दूसरे मार्ग से बाहर जा रहे हैं। दूसरा मार्ग गेट नंबर 4 छत्ता द्वार है जिसमें श्रद्धालु बद्रीनाथ प्रवेश द्वार से प्रवेश करते हुए गर्भगृह के उत्तरी दरवाजे पर दर्शन करते हुए पुनः उसी दरवाजे से बाहर श्रृंगार गौरी की तरफ से वापस आ रहे हैं। तीसरा मार्ग बांस फाटक से आने वाले श्रद्धालु ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए अभी मुक्तेश्वर द्वार से प्रवेश कर रहे हैं और गर्भगृह के दक्षिणी दरवाजे पर बाबा का दर्शन कर हनुमान मंदिर द्वार से होते हुए नंदू फारिया गली से बाहर निकल रहे हैं। महामृत्युंजय मंदिर बंद रहा, श्रद्धालुओं ने दूर से ही किया प्रणाम कोरोना संकट काल में दारानगर स्थित महा मृत्युजंय मंदिर का पट शिवभक्तों के लिए बंद रहा।

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न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के कारण इस साल पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा पर लगाई रोक https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a1-19-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0/ https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a1-19-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0/#respond Fri, 19 Jun 2020 05:29:16 +0000 http://www.antimpravakta.com/?p=3380 अंतिम प्रवक्ता, 18 जून, 2020। उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर इस साल पुरी में 23 जून से आयोजित होने वाली ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा और इससे संबंधित गतिविधियों पर रोक लगा दी। न्यायालय ने कहा कि ‘‘अगर हम इसकी अनुमति देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।’’ प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुये इस साल पुरी में रथ यात्रा की अनुमति […]

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अंतिम प्रवक्ता, 18 जून, 2020। उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर इस साल पुरी में 23 जून से आयोजित होने वाली ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा और इससे संबंधित गतिविधियों पर रोक लगा दी। न्यायालय ने कहा कि ‘‘अगर हम इसकी अनुमति देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।’’ प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुये इस साल पुरी में रथ यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर हम इस साल रथ यात्रा आयोजित होने देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।’’ पीठ ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान इतना बड़ा समागम आयोजित नहीं हो सकता। पीठ ने ओडिशा सरकार से कहा कि वह महामारी के प्रसार से बचने के लिये राज्य में कहीं भी रथ यात्रा या धार्मिक जुलूस और इससे संबंधित गतिविधियों की अनुमति नहीं दे। इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले गैर सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर रथ यात्रा की अनुमति दी गयी तो बड़ी संख्या में लोग एकत्र होंगे जिस वजह से उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का बहुत ज्यादा खतरा बना रहेगा। पीठ ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें इस मसले पर जवाब देने के लिये कल तक का वक्त चाहिए। इस मामले में एक हस्तक्षेपकर्ता के वकील ने कहा कि ओडिशा सरकार पहले ही एक अधिसूचना जारी कर चुकी है कि 30 जून तक कोई भी सार्वजनिक समागम नहीं होगा। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह 23 जून से शुरू होने वाले इस महोत्सव पर रोक लगा रही है। शीर्ष अदालत ने ओडिशा स्थित एक गैर सरकारी संगठन ओडिशा विकास परिषद की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में 10 से 12 दिन चलने वाली रथ यात्रा को इस साल रद्द करने या फिर इसे स्थगित करने का अनुरोध किया था। इस आयोजन में दुनिया भर के लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा, भारतीय विकास परिषद नाम के संगठन के सुरेन्द्र पाणिग्रही ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के नौ जून के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर कर रखी है। इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार से कहा था कि वह कोविड-19 के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुये रथ यात्रा महोत्सव आयोजित करने के बारे में निर्णय ले।

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लाॅकडाउन के बीच महिलाओं ने सुरक्षित तरीके से वट सावित्री की पूजा https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a5%85%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9a-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%a8/ https://www.antimpravakta.com/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a5%85%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9a-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%a8/#respond Sat, 23 May 2020 06:26:12 +0000 http://www.antimpravakta.com/?p=3040 अंतिम प्रवक्ता, 22 मई, 2020। अपने सुहाग और अपने कुटुम्ब की कुशलता के लिए वट सावित्री व्रत के दिन बरगद की पेड़ की पूजा करने की मान्यता है और व्रती महिलाओं ने कोरोना वायरस को देखते हुए सोशल डिन्सेंटिग पालन करते हुये सुरक्षित तरीके से पूजा करने का रास्ता निकाल लिया है। मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा होती है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग और उनकी कुशलता के लिए उपासना करके समस्त नारीशक्तियों को त्याग, तपस्या और समर्पण की प्रेरणा देती है। […]

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अंतिम प्रवक्ता, 22 मई, 2020। अपने सुहाग और अपने कुटुम्ब की कुशलता के लिए वट सावित्री व्रत के दिन बरगद की पेड़ की पूजा करने की मान्यता है और व्रती महिलाओं ने कोरोना वायरस को देखते हुए सोशल डिन्सेंटिग पालन करते हुये सुरक्षित तरीके से पूजा करने का रास्ता निकाल लिया है। मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा होती है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग और उनकी कुशलता के लिए उपासना करके समस्त नारीशक्तियों को त्याग, तपस्या और समर्पण की प्रेरणा देती है। वट सावित्री व्रत के दिन मातृशक्तिओं की तपस्या से प्राणी जगत में खुशहाली रहती है,और इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा होती है।

पौरणिक ग्रंथों के अनुसार, भद्र देश के राजा अश्वपति बड़े ही प्रतापी और धर्मात्मा थे, उनके इस व्यवहार से आम जनमानस में हमेशा खुशहाली रहती थी, लेकिन राजा अश्वपति संतान न होने के कारण हमेशा चिंतित रहते थे, जिससे संतान प्राप्ति के लिये प्रतिदिन गायत्री मंत्र के साथ यज्ञ और हवन किया करते थे। उनके इस यज्ञ से माता गायत्री प्रसन्न होकर बोली हे, राजन मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हुई, तुम्हारे घर जल्द ही एक कन्या जन्म लेगी जो संसार में नारी शक्ति के महत्व को उजागर करेगी।

इसके बाद राजा अश्वपति के घर बेहद रूपवान कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम सावित्री रखा गया, सावित्री के बड़ी हो जाने पर राजा अश्वपति ने अपनी कन्या से कहा हे देवी, आप स्वयं मनचाहा वर ढ़ूंढकर विवाह कर सकती है, तब सावित्री को एक दिन वन में राजा द्युमत्सेन मिले, सावित्री ने मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया, लेकिन नारद जी राजा अश्वपति से बोले आपकी कन्या ने जो वर चुना है उसकी अकारण जल्द ही मृत्यु हो जाएगी, आप इस विवाह को रोक दें।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार राजा अश्वपति के कहने के बावजूद सावित्री नहीं मानी और राजा द्युमत्सेन से शादी कर ली, इसके अगले साल ही राजा द्युमत्सेन की मृत्यु हो गई, उस समय दुखी होकर सावित्री अपने मृत पति को गोदकर में लेकर बैठ गई। तभी यमराज आकर राजा द्युमत्सेन की आत्मा को लेकर जाने लगे तो सावित्री उनके पीछे-पीछे चल पड़ी,यमराज के बहुत मनाने के बाद भी सावित्री नहीं मानीं तो यमराज ने उन्हें वरदान मांगने का प्रलोभन दिया, लेकिन सावित्री ने अपने सूझबूझ और अपनी त्याग तपस्या के बल पर सभी की कुशलता मांगी। सबसे पहले अपने अंधे सास-ससुर के लिए ज्योति मांगी। छिना हुआ राज-पाट मांगा और दूसरे तीसरे में सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा। जिसे यमराज ने स्वीकार कर चल दिए।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब सावित्री यमराज के पीछे पीछे चलती रही तो यमराज ने कहा अब आपको क्या चाहिए। तब सावित्री ने कहा हे यमदेव आपने सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान तो दे दिया, लेकिन बिना पति के मैं मां कैसे बन सकती हूं। यह सुन यमराज स्तब्ध हो गए, इसके बाद उन्होंने राजा द्युमत्सेन के प्राण को अपने बंधन से मुक्त कर दिया,

तब से वट सावित्री व्रत चला रहा है, जिससे मातृशक्तियों के त्याग, तपस्या, भक्ति, सेवा, समर्पण और सूझबूझ के आगे पूरा संसार आज भी आत्मसमर्पण करता है। आज के दिन महिलाएं जहाँ भी बट बृक्ष होता था, वहाँ झुंड में पहुँच कर पूजन अर्चन व बट बृक्ष की पीला धागा लपेट कर 108 परिक्रमा कर अपने पति के दीर्घायु व सफल जीवन की याचना करती हैं। लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए जब लाकडाउन के कारण घरों से बाहर निकलना प्रतिबंधित है तब व्रती महिलाएं अपने अपने घरों में पूजा कर रही है।

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