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Home›News›श्रम मंत्रालय ने श्रम संहिताओं के बारे में व्यक्त आशंकाओं को निराधार बताया

श्रम मंत्रालय ने श्रम संहिताओं के बारे में व्यक्त आशंकाओं को निराधार बताया

By Antim Pravakta
September 29, 2020
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श्रम मंत्रालय ने श्रम संहिताओं के बारे में व्यक्त आशंकाओं को निराधार बताया

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सोमवार को संसद में पिछले सप्ताह पारित श्रम संहिताओं को लेकर व्यक्त की जा रही शंकाओं को दूर करते हुये इन संहिताओं को एतिहासिक और व्यापक बदलाव लाने वाला सुधारवादी कानून बताया। इसमें कहा गया हैए ष्ष्इनको लेकर जो आलोचनायें की जा रहीं हैं वह पूरी तरह से निराधार है।ष्ष् कारखानों में काम बंद करने के मामले में इकाइयों में कर्मचारियों की न् यूनतम सीमा को 300 किए जाने के संबंध में स् पष् टीकरण देते हुए मंत्रालय ने कहा है विभाग से संबंधित संसदीय स् थायी समिति ने छंटनीए कामबंदी तथा बंदी के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेने के मामले में कामगारों की तय सीमा को 100 से बढ़ाकर 300 करने की सिफारिश की थी। यह प्रावधान केवल सरकार से पूर्वानुमति लेने के मामले में एकमात्र पहलु है। इसमें अन्य लाभ तथा कामगारों के अधिकारों को संरक्षित किया गया है। कामगारों के अधिकार तथा छंटनी से पूर्व नोटिसए सेवा के प्रत् येक पूरे किए गए वर्ष के लिए 15 दिनों के वेतन की दर से प्रतिपूर्ति तथा नोटिस अवधि के बदले में वेतन देने के बारे में कोई समझौता नहीं किया गया है। इसके अलावाए औद्योगिक संबंध सं हिता में नवसृजित पुनर्कौशल निधि के अंतर्गत 15 दिनों के वेतन के समान अतिरिक्त आर्थिक लाभ की संकल्पना की गई है। वक्तव्य में कहा गया है कि ऐसा कोई व्यावहारिक दृष्टांत नहीं है जिसमें यह पता चलता है कि कामबंदी के मामले में पूर्वानुमति लेने संबंधी प्रावधान में कर्मचारियों की सीमा बढ़ाये जाने से उद्योगों में ष्हायर एवं फायरष् को बढ़ावा मिलता है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि आर्थिक सर्वेक्षणए 2019 में भारतीय कंपनियों की मौजूदा लघु संरचना ;ड्वार्फिज्मद्ध की पीड़ा का विश्लेषण किया गया है। लघु संरचना से आशय उन कंपनियों से है जो 10 वर्षों से अधिक समय से चल रही हैं लेकिन रोजगार में वृद्धि के रूप में उनमें कोई प्रगति नहीं हुई है। औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत 100 कामगारों की तय सीमा को रोजगार सृजन के अवरोधकों में से एक पाया गया है। यह भी देखा गया है कि श्रम विधानों के अंतर्गत अवसीमा नकारात्मक प्रभाव डालती हैं जिससे कि कंपनियां आकार में छोटी रह जाती हैं। राजस्थान में वर्ष 2014 के दौरान उन कंपनियों के मामले में जिनमें 300 से कम कामगार नियोजित हैं उनमें अवसीमा को 100 से बढ़ाकर 300 किया गया था तथा छंटनी इत्यादि से पहले पूर्वानुमति की अपेक्षा को समाप्त कर दिया गया था। सीमा में वृद्धि से राजस्थान में पड़ने वाले प्रभाव यह दर्शाते हैं कि राजस्थान में उन कंपनियों की औसत संख्याए देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी बढ़ी है जिनमें 100 से अधिक कामगार नियोजित हैं तथा उन कारखानों में उत्पादकता में भी काफी वृद्धि हुई है। 15 अन्य राज्यों में पहले ही अवसीमा को बढ़ाकर 300 कामगार तक कर दिया गया है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि औद्योगिक संबंध संहिता के पारित होने से पूर्व राजस्थान के उदाहरण का अनुसरण करते हुए राजस्थान सहित 16 राज्यों ने औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत पूर्वानुमति लेने के मामले में कर्मचारी सीमा 100 कामगार से 300 कामगारों कर दी है। इन राज्यों में आंध्र प्रदेशए अरुणाचल प्रदेशए असमए बिहारए गोवाए गुजरातए हरियाणाए हिमाचल प्रदेशए झारखण्डए कर्नाटकए मध्य प्रदेशए मेघालयए ओडिशा शामिल हैं। मंत्रालय ने किसी तय अवधि के लिये काम पर रखने के साथ ष्हायर और फायरष् शुरू होने की अफवाहों को दरकिनार करते हुए कहा है कि निर्धारित अवधि का नियोजन केन् द्र सरकार तथा 14 अन्य राज्यों द्वारा पहले ही अधि सूचित किया जा चुका है। इन राज्यों में असमए बिहारए गोवाए गुजरातए हरियाणाए हिमाचल प्रदेशए झारखण्ड ;परिधान एवं मेड.अपद्धए कर्नाटकए मध्य प्रदेशए ओडिशाए पंजाबए राजस्थानए उत्तर प्रदेश ;वस्त्र एवं ईओयूद्ध तथा उत्तराखण्ड शामिल हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि निर्धारित समयसीमा के लिये नियुक्ति कामगार.समर्थक है। इससे रोजगार के लिए ठेकेदार के माध्यम से जाने के बजाय कामगार या कर्मचारी के साथ सीधे तय समयसीमा के लिये नियुक्ति का ठेका करना संभव होगा। ऐसे आरोप लगाए गए हैं कि ठेकेदार न्यूनतम मजदूरी और अन्य पात्र लाभों जैसे ईपीएफए ईएसआईसी के संबंध में नियोक्ता से तो पूरी राशि वसूल करते हैं लेकिन इसे ठेका श्रमिकों को नहीं पहुँचाते हैं। अंतर.राज्यीय प्रवासी कामगार की परिभाषा के बारे में वक्तव्य में कहा गया है कि अंतर.राज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियमए 1979 को ओएसएच कोड में शामिल कर लिया गया है। पूर्ववर्ती अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को ओएसएच कोड में और अधिक सशक्त किया गया है। इस संबंध मेंए मंत्रालय ने प्रवासियों सहित असंगठित कामगारों का नामांकन करने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस विकसित करने के भी उपाय किए हैंए जो अन्य बातों के साथ.साथ परस् पर प्रवासी कामगारों को नौकरी दिलानेए उनका कौशल मापन करने और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ दिलाने में सहायक होगा। यह सामान्य रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बेहतर नीति निर्माण में भी सहायक होगा। महिलाओं के लिए रात की पालियों की अनुमति के प्रावधान की आलोचना के बारे मेंए केन्द्रीय श्रम मंत्री ने कहा है कि यह स्पष्ट रूप से गलत है क्योंकि ओएसएच कोड नए भारत में लैंगिक समानता पर आधारित है। इस कोड में यह परिकल्पना कि गई है कि महिलाएं सभी प्रकार के कार्यों के लिए सभी प्रतिष्ठानों में नियोजित किए जाने की पात्र होंगी तथा उन्हें रात के दौरान भी काम पर लगाया जा सकता है। रात में महिलाओं को नियोजन के लिए उनकी सहमति को अनिवार्य बनाया गया है। इसके अलावाए सरकारें महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति देने से पहले सुरक्षाए अवकाश और कार्य के घंटों की शर्तें निर्धारित करेगी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि श्रमजीवी पत्रकारों के प्रावधान इन्हें सशक्त करने के लिए बनाए गए हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्यरत पत्रकारों को शामिल करने के लिए श्रमजीवी पत्रकारों की परिभाषा का विस्तार करना तथा श्श्रमजीवी पत्रकारोंश् के लिए सेवा अवधि के कम.से.कम ग्याहरवें हिस्से के बराबर पूर्ण वेतन के समतुल् य अर्जित छुट्टी की अनुमति देना शामिल है। इन छुट्टियों का संचय किया जा सकता है और संचित छुट्टियों का नकदी मुआवजा लिया जा सकता है या ये छुट्टियां ली जा सकती हैं। इसमें आगे कहा गया कि श्रमजीवी पत्रकारों के कल्याण हेतु मौजूदा प्रावधानों को कायम रखा गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता और ओएसएच कोड में अंतर.राज्यीय प्रवासी कामगारों की परिभाषा समान है। मजदूरी संबंधी संहिता के अंतर्गत बनाए गए प्रारूप नियमों में श्रमजीवी पत्रकार एवं अन्य समाचार.पत्र कर्मी ;सेवा शर्तेंद्ध और विविध प्रावधान अधिनियमए 1955 की धारा 2 के खण्ड ;एफद्ध में यथा परिभाषित श्रमजीवी पत्रकार के लिए संहिता के अंतर्गत न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने के लिए श्रमजीवी पत्रकार की तकनीकी समिति के गठन का प्रावधान है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गतए श्रमजीवी पत्रकार के लिए ग्रेच् युटी की पात्रता बनाकर नहीं रखी गई है लेकिन पात्रता की अवधि में सुधार करके अन्यों के लिए पांच वर्षों के बजाय सेवा की अवधि तीन वर्ष तक कर दी गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ओएसएच संहिता के तहत नए कल्याणकारी प्रावधान पेश किए गए हैं दृ जोखिमपूर्ण और खतरनाक व्यवसाय चलाने वाले प्रतिष्ठान के लिएए सरकार तय सीमा से कम कामगार रखने वाले प्रतिष्ठानों पर भी कवरेज को अधिसूचित कर सकती है। ईएसआईसी का विस्तार बागान कामगारों तक कर दिया गया है। नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। निरूशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य चेकअप आरम्भ किया गया है। जोखिमकारी फैक्ट्रियों के स्थान पर फैक्ट्रीए खानों और बागानों में प्रतिष्ठानों के लिए द्विपक्षीय सुरक्षा समिति शुरू की गई है। कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे बागान कामगारों की गतिविधियों को जोखिमकारी गतिविधियों में शामिल किया गया है। इसके साथ ही अंतर.राज् यीय प्रवासी कामगार से संबंधित प्रावधानों को सुदृढ़ बनाना और गृह नगर जाने हेतु वार्षिक यात्रा भत्ता के प्रावधान को शामिल किया गया है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि विकेंद्रीकृत पंजीकरण प्रक्रिया आरम्भ करने से ट्रेड यूनियनों की स्थिति मजबूत हुई है। मंत्रालय ने 14 दिन की नोटिस अवधि के विषय से संबंधित अफवाहों को निराधार बताया है। इसमें कहा गया है कि हड़ताल पर जाने से पूर्व यह श्रमिक की शिकायत का समाधान करने का एक और अवसर प्रदान करते हैं ताकि प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से मुद्दों का समाधान ढूंढ़ पाए।

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर सरकार ने कंपनियों को दी राहतए कई योजनाओं की समयसीमा बढ़ाई
नई दिल्लीए 28 सितंबर ;वेबवार्ताद्ध। कोरोना वायरस की वजह से पैदा अड़चनों के बीच कंपनियों को राहत देते हुए सरकार ने ष्कई योजनाओंष् की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनीज फ्रेश स्टार्ट स्कीम तथा एलएलपी निपटान योजना की अवधि बढ़ा दी है। इसके अलावा कंपनियों को असाधारण आम बैठक ;ईजीएमद्ध और बोर्ड बैठक इस साल के अंत तक वीडियो कॉन्फ्रेंस या इसी तरह के अन्य माध्यमों से करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही कंपनी कानूनए 2013 के तहत शुल्क के सृजन या संशोधन से संबंधित फॉर्म जमा कराने की समयसीमा में भी छूट दी गई है। स्वतंत्र निदेशकों के लिए डेटा बैंक पर खुद का पंजीकरण कराने के समय को भी बढ़ाया गया है। पहले ये सभी समय सीमाएं 30 सितंबर को समाप्त हो रही थीं। वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय की ओर से ट्वीट कर बताया गया है कि कई योजनाओं की समयसीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबरए 2020 कर दिया गया है। ट्वीट में कहा गया है कि कोविड.19 महामारी की वजह से पैदा हुई दिक्कतों तथा कारोबार सुगमता की स्थिति को बेहतर करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कंपनीज फ्रेश स्टार्ट स्कीम और एलएलपी निपटान योजना एक अप्रैल से शुरू हुई है। इसका मकसद कंपनियों को अपने पुराने डिफॉल्ट को ठीक करने का अवसर देना है। इन योजनाओं के तहत इकाइयां विलंब शुल्क के बिना ब्योरा जमा करा सकती हैं। साथ ही जरूरी ब्योरा जमा कराने में देरी पर उनको दंडात्मक कार्रवाई से भी छूट दी गई है। स्वतंत्र निदेशकों को कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय कंपनी मामलों के संस्थान ;आईआईसीएद्ध द्वारा तैयार स्वतंत्र निदेशक डेटा बैंक में खुद का पंजीकरण कराना होता है। स्वतंत्र निदेशकों के लिए पंजीकरण का समय बढ़ाया गया है।

सेबी ने एक्सचेंजोंए समाशोधन निगमों से चूक करने वाले सदस्यों की संपत्तियों का परिसमापन करने को कहा
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ;सेबीद्ध ने शेयर बाजारों तथा समाशोधन निगमों ;क्लियरिंग कॉरपोरेशनद्ध से कहा है कि वे चूक या डिफॉल्ट करने वाले सदस्यों की संपत्तियों का परिसमापन संबंधित इकाई को चूककर्ता घोषित करने के छह माह के भीतर करें। नियामक ने कहा कि चूक करने वाले सदस्यों की उन चल और अचल संपत्तियों का परिसमापन उचित कानूनी तरीके से किया जाना चाहिएए जो शेयर बाजारों या समाशोधन निगमों के नियंत्रण में नहीं हैं। सेबी के सर्कुलर में कहा गया है कि इन डिफॉल्टरों से वसूली से ग्राहकोंए शेयर बाजारों तथा समाशोधन निगमों की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। सदस्यों द्वारा अपने मंच पर कारोबार के मामले में प्रतिभूति बाजार में मान्यता प्राप्त शेयर एक्सचेंज पहले स्तर के नियामक के रूप में काम करता है। सेबी ने कहा कि कुछ मामलों में चूक करने वाले सदस्यों के पास ग्राहकोंध्शेयर बाजारों तथा समाशोधन निगमों की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कोष या प्रतिभूतियों की कमी होती है। सेबी ने कहा कि शेयर बाजारों तथा समाशोधन निगमों को चूक करने वाले सदस्यों की संपत्तियों के परिसमापन के लिए उचित कार्रवाई करने की सलाह दी जाती है। नियमों के तहत शेयर बाजार किसी सदस्य द्वारा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहने पर डिफॉल्टर घोषित कर सकते हैं।

प्राकृतिक संसाधनों की बिना लाइसेंस खोज करने की व्यवहार्यता पर गौर करेगा राजस्थानरू गहलोत

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को कहा कि राजस्थान सरकार राज्य में चांदी सहित विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों की बिना लाइसेंस के ही खोज कराये जाने की व्यवहार्यता पर गौर करेगी। गहलोत की तरफ से यह वक्तव्य ऐसे समय सामने आया है जब धातु और खनन क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने सुझाव दिया कि राजस्थान में प्राकृतिक संसाधनों की खोज को लाइसेंस मुक्त कर दिया जाना चाहिये। गहलोत ने ष्चांदी की संभावनाओं का लाभ उठानेष् पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुये कहाए ष्ष्आपने ;अनिल अग्रवालद्ध सुझाव दिया कि खोज का काम बिना लाइसेंस के ही करने दिया जाना चाहिये। आपने पहले भी इस तरह का सुझाव मुझे दिया था। क्या यह केन्द्र सरकारए राज्य सरकार की तरफ से संभव हैघ् हम इसकी व्यवहार्यता के बारे में पता लागायेंगे। यह आपका क्रांतिकारी सुझाव है।ष्ष् गहलोत ने माना कि चांदी सहित प्राकृतिक संसाधनों का राजस्थान में अच्छा भंडार है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की खोज का काम तेज किया जायेगा और इससे पूरे देश को फायदा होगा। वेबिनार में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान में पूरे देश को प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराने की क्षमता हैए लेकिन इसके लिये सरकार को खोज कार्य को विभिन्न शर्तों से मुक्त करना होगा। उन्होंने कहाए ष्ष्वर्तमान में खोज कार्य में बहुत समस्या है ण्ण्ण् यदि राजस्थान में खोज को बंधन मुक्त कर दिया जाता है तो फिर तेलए चांदीए जस्ता ण्ण्ण् सहित तमाम क्षेत्र हैं जहां व्यापक संभावनायें हैं।ष्ष् नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने इस अवसर पर कहा कि आने वाले दिनों में उद्योगों में इस्तेमाल के लिये चांदी की मांग बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि कोविड. 19 महामारी के बादल छंटने के बाद नीति आयोग वेदांता समूह के साथ काम करने की इच्छा रखता है। इसके साथ ही राजस्थान में एक बड़ी कार्यशाला का आयोजन करने की भी जरूरत है।

अपनी ही पांच सदस्यीय पीठ के फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है एनसीएलएटी
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर नई दिल्लीए 28 सितंबर ;वेबवार्ताद्ध। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ;एनसीएलएटीद्ध अपनी पांच सदस्यीय पीठ के फैसले पर पुनर्विचार कर सका है। यह मामला दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की समयसीमा पर निर्णय करने के लिए कंपनी के बही खाते में शामिल ऋण की प्रविष्टियों की स्वीकार्यता से संबंधित है। मुद्दा यह है कि क्या बही खाते में डाली गई प्रविष्टियों को तीन साल की सीमा की गणना के लिए ऋण की स्वीकृति के रूप में लिया जा सकता है। क्या यह लिमिटेशन कानूनए 1963 की धारा 18 के तहत मान्य है। लिमिटेशन कानून दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता ;आईबीसीद्ध की प्रक्रियाओं में भी मान्य है। एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने पिछले सप्ताह एक विरला उदाहरण पेश करते हुए कहा था कि उसकी पांच सदस्यीय पीठ द्वारा पिछले साल मार्च में जारी आदेश निश्चित कानून से उलट है। तीन सदस्यीय पीठ ने निष्कर्ष दिया कि वी पद्मकुमार के मामले में फैसले पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय और इलाहाबादए कलकताए दिल्लीए कर्नाटकए केरल और तेलंगाना के उच्च न्यायालयों का विचार है कि लिमिटेशन कानून की धारा 18 के लिए कंपनी के बही खाते में दर्ज प्रविष्टियां को ऋण की स्वीकार्यता के रूप में लिया जाना चाहिए।

कोल इंडिया ने कोयले से मेथेनॉल बनाने के लिये वैश्विक बोलियां आमंत्रित की
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिण् ;सआईएलद्ध ने सोमवार को कहा कि उसने कोयले से मेथेनॉल बनाने के संयंत्र लगाने को लेकर वैश्विक बोलियां आमंत्रित की है। प्रस्तावित संयंत्र के लिये पश्चिम बंगाल में दानकुनी कोल काम्प्लेक्स ;डीसीसीद्ध को परियोजना स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है। फिलहाल डीसीसी का जिम्मा कोल इंडिया की अनुषंगी साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिण् के पास है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने एक बयान में कहाए ष्ष्कोल इंडिया लिण् ने पिछले शुक्रवार को खुली वैश्विक निविदा जारी की। इसके जरिये कोयले से मेथेनॉल बनाने ;सीटूएमद्ध का संयंत्र सतही कोयला गैसीकरण के जरिये लगाने को लेकर बोलियां आमंत्रित की गयी हैं। यह कारखाना बनाओ.अपनाओ.चलाओ ;बीओओद्ध मॉडल पर आधारित होगा।ष्ष् कोल इंडिया ने बीओओ परिचालक के चयन को लेकर व्यवहार्यता पूर्व अध्ययन के आधार पर यह निविदा जारी की है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहाए ष्ष्यह सरकार के मेथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था कार्यकम के क्रियान्वयन का हिस्सा है। इसका मकसद देश के आयात बिल में कमी लाना है।ष्ष् संयंत्र के लिये पूंजी व्यय करीब 6ए000 करोड़ रुपये आकलित किया गया है। बीओओ परिचालक संयंत्र का डिजाइनए निर्माणए रखरखावए उत्पादन और भंडारण के अलावा उसे पट्टे पर भी दे सकेंगे। कोल इंडिया प्रस्तावित संयंत्र के लिये परिचालक को जमीनए बिजली और पानी उपलब्ध कराएगी। योजना के अनुसार संयंत्र से सालाना 6ण्76 लाख टन मेथेनॉल उत्पादन का लक्ष्य है। इसका उपयोग पेट्रोल में 15 प्रतिशत तक मिश्रण में किया जाएगा। संयंत्र इस क्षमता के आधार पर चार पूर्वी राज्यों पश्चिम बंगालए ओड़िशाए झारखंड और बिहार की जरूरतों को पूरा करेगा। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 17 दिसंबर है। सफल बोलीदाता को संयंत्र को चालू करने के लिये 41 महीने का समय दिया जाएगा।

कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारत.अमेरिकी गठजोड़ को सुदृढ़ करेगारू अरकंसास गवर्नर

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । अमेरिका और भारत के बीच ष्ऐतिहासिकष् रिश्ते को कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के साथ और मजबूत किया जा सकता है। अरकंसास राज्य के गवर्नर असा हचिंसन ने यह बात कही है। श्भारत. अरकंसास साझेदारी रू खाद्य प्रसंस्करणए लॉजिस्टिक्स और विनिर्माणश् विषय पर आयोजित वेबिनार में भाग लेते हुए गवर्नर हचिंसन ने कहा कि अरकंसास और भारत में व्यापार के अवसर हैं और उनमें सहयोग दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद होगा। हचिंसन ने बुधवार को कहाए ष्ष्हमने भविष्य के लिए एक अविश्वसनीय नींव रखी है। और यह नींव लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धताए उद्यमशीलताए व्यवसाय और व्यापार के लिए हमारे आपसी प्रेम पर आधारित है।ष्ष् भारत सरकार द्वारा आयोजित वेबिनार में हचिंसन के अलावाए भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की सचिव पुष्पा सुब्रह्मण्यम और ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्य दूत असीम आर महाजन ने भाग लिया। गवर्नर ने अक्टूबरए 2019 में भारत की अपनी यात्रा का स्मरण किया। उन्होंने कहाए ष्ष्हमने अपनी ष्अतुल्य भारत यात्राष् के दौरान कई कंपनियों से मुलाकात कीए जिनमें कपड़ा से लेकर इस्पात और प्रौद्योगिकी कंपनियां तक शामिल थीं।ष्ष् उन्होंने कहाए ष्ष्कृषि आर्थिक रूप से हमारे लिए सबसे पहले हैए खाद्य प्रसंस्करण हमारे लिए स्वाभाविक हैए इसके बाद इस्पात उद्योग है। हमारे पास बिग रिवर स्टीलए नकोर.यामातो स्टील कंपनी जैसी प्रमुख इस्पात मिलें हैं।ष्ष् उन्होंने कहाए ष्ष्वैमानिकी और रक्षा उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था का एक अन्य प्रमुख हिस्सा है। लॉकहीड मार्टिनए डसॉल्ट फाल्कनए एयरोजेट रॉकेटडेनए रेथियॉन मिसाइल सिस्टमए जनरल डायनेमिक्स जैसी कंपनियां हैं। भारत में महत्वपूर्ण निवेश और साझेदारी रखने वाली टायसन और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियां यहां स्थित हैं।ष्ष् हचिसन ने ष्ष्अरकंसास में जीवंत और महत्वपूर्ण भारतीय.अमेरिकी समुदाय का भी उल्लेख कियाए जो सभी प्रमुख क्षेत्रोंए विशेष रूप से चिकित्साए शिक्षा में योगदान करते हैं।ष्ष् महावाणिज्य दूत महाजन ने कहाए ष्ष्हम आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए गवर्नर हचिंसन के समर्थन को गहराई से महत्व देते हैंए जिसके परिणामस्वरूप आठ प्रमुख भारतीय कंपनियों ने सूचना प्रौद्योगिकीए विनिर्माण और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में लगभग 1ए700 नौकरियों का सृजन करते हुए अरकंसास में 39ण्2 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश किया है।ष्ष् भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के बारे में जानकारी देते हुए सचिव सुब्रह्मण्यम ने कहाए ष्ष्भारत में चैंपियन क्षेत्रों में से एकए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को माना जाता है जहां नीतिगत बदलाव हुए हैं। इनमें अड़चनों को दूर करने के उपायए राजकोषीय उपायों द्वारा तेजी से निवेश और बेहतर सुविधा वाला वातावरण बनाया जाना शामिल है।ष्ष् भारत सरकार द्वारा संसद के मानसून सत्र में खेती के कामकाज से संबंधित तीन विधेयकों को पिछले सप्ताह पारित कराया गया जिनके बारे में उन्होंने कहा कि ये विधेयक देश के कृषि क्षेत्र में क्रांति लाएंगे। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अरकंसास और अमेरिका से निवेश और बढ़ेगा तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की मदद हमें मजबूत सहयोगी की भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगी।ष्ष्

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने 2019.20 में दिए 2ण्72 लाख नए पीएनजी कनेक्शन
अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ;आईजीएलद्ध ने 2019.20 में 2ण्72 लाख नए कनेक्शन देने का रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। आईजीएल दिल्ली.एनसीबार में मुख्य तौर पर पाइप्ड नेचुरल गैस ;पीएनजीद्ध का वितरण करने वाली अग्रणी कंपनी है। इसके अलावा समीक्षावधि में कंपनी ने अपने परिचालन क्षेत्र में 55 नए सीएनजी स्टेशन भी खोले हैं। कंपनी के सीएनजी स्टेशनों की संख्या बढ़कर 557 हो गयी है। कंपनी की 21वीं वार्षिक आम सभा को संबोधित करते हुए चेयरमैन पीण् केण् गुप्ता ने कहा कि सरकार के देशभर में सीएनजी और पीएनजी के बुनियादी ढांचे को विस्तार देने के प्रयासों के अनुरूप कंपनी ने अपने परिचालन क्षेत्र में 2ण्72 लाख नए पीएनजी कनेक्शन दिए हैं। गुप्ता ने कहा कि समीक्षावधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 44 प्रतिशत बढ़कर 1ए137 करोड़ रुपये रहा। वहीं कंपनी की कुल बिक्री सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़ी। अगर अलग.अलग देखा जाए तो सीएनजी की बिक्री में 8ण्4 और पीएनजी की बिक्री में 12 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ इस दौरान 1ए249 करोड़ रुपये रहा। इसमें उसकी सहयोगी कंपनी सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड और महाराष्ट्र नेचुरल गैस लिमिटेड का योगदान शामिल है। कंपनी दिल्लीए नोएडाए ग्रेटर नोएडाए गाजियाबादए रेवाड़ीए गुरुग्रामए करनालए कैथलए फतेहपुर और मुजफ्फरनगर में सीएनजी स्टेशन का परिचालन करती है। वहीं कंपनी ने अपने पीएनजी परिचालन नेटवर्क का राजस्थान के अजमेरए पाली और राजसमंद एवं उत्तर प्रदेश के शामिलीए मेरठए हमीरपुर और कानपुर शहरों में विस्तार किया है।
भारत ने चीन से औषधि बनाने में उपयोग कच्चे माल की कथित डंपिंग की जांच शुरू की

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । भारत ने औषधियों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल सेफ्ट्रिजोन सोडियम स्टेराइल की चीन से कथित डंपिंग की जांच शुरू की है। घरेलू विनिर्माताओं की शिकायत पर यह कदम उठाया गया है। नेक्टर लाइफ साइंसेस एंड स्टेरिल इंडिया ने वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई व्यापार उपचार महानिदेशालय ;डीजीटीआरद्ध के समक्ष आवेदन देकर डंपिंग की जांच शुरू किये जाने का आग्रह किया था। डीजीटीआर की अधिसूचना के अनुसार चीन से सस्ते दाम पर निर्यात से घरेलू विनिर्माताओं के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। सेफ्ट्रिजोन सोडियम स्टेराइल रसायन या कच्चा माल है जिसका उपयोग पेटों के अंदर संक्रमणए त्वचा संक्रमण और श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। अधिसूचना के अनुसार डंपिंग को लेकर आवेदन और जरूरी साक्ष्य उपलब्ध कराने जाने के बाद प्राधिकरण ने मामले की जांच शुरू की है। अगर डीजीटीआर को जांच में डंपिंग का पता चलताए जिससे घरेलू विनिर्माताओ के हितों का नुकसान हो रहा हैए वह डंपिंग रोधी शुल्क की सिफारिश करेगा। डीजीटीआर शुल्क की सिफारिश करता है जबकि वित्त मंत्रालय इसे अमल में लाता है। जांच की अवधि अप्रैल 2019 से मार्च 2020 है। इसमें अप्रैल 2016 से 2019 के आंकड़ों पर भी गौर किया जाएगा।

सदन की बैठक में कई प्रस्तावों को दी हरी झंडी

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । पूर्वी दिल्ली नगर निगम की सदन की बैठक में कई प्रस्तावों को पास किया गया है जिसमें निगम पार्षद श्याम सुंदर अग्रवाल द्वारा अस्थाई कर्मचारियों की सैलरी 14 से 25000 करने की मांग को लेकर लगाए गए प्रस्ताव को पक्ष विपक्ष के पार्षदों ने समर्थन किया। वहीं वार्डों में जनसंख्या के अनुपात में सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए जाने से संबंधित प्रस्ताव को पास कर दिया है। इसके बगैर साफ सफाई की व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता। प्रस्ताव सत्ता पक्ष के निगम पार्षद गोविंद अग्रवाल द्वारा रखा गया था। वहीं विपक्षी निगम पार्षदों ने सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती करने से पहले 20.25 साल से एवजीदार के तौर पर तैनात सभी सफाई कर्मचारियों को जल्द से जल्द पक्का किया जाए। प्रस्ताव में कहा गया कि क्षेत्र को स्वच्छ रखना ईस्ट एमसीडी के प्राथमिक कार्यों में से एक है। प्रत्येक वार्ड में हर गलीए सड़कए नाली नाले की सफाई करनाए किसी भी प्रकार की गंदगी फैलने से रोकना और पर्यावरण को स्वच्छ रखना भी उसी का एक हिस्सा है। यह तमाम तरह के कार्य तभी हो सकते है जब प्रत्येक वार्ड में उपयुक्त संख्या में सफाई कर्मचारी होंगे। इस समय हालत यह है कि किसी वार्ड में सफाई कर्मचारियों की संख्या 525 है तो किसी वार्ड में मात्र 180 सफाई कर्मचारी ही तैनात है। जबकि जो बड़े वार्ड है उनमें अधिक संख्या में सफाई कर्मचारी तैनात होने चाहिए। प्रस्ताव में यह बात भी कही गई कि वार्डों में सफाई कर्मचारी तैनात करने का जो सिस्टम है वह 36 साल पहले बना था। उस समय पूरी दिल्ली में वार्डों की संख्या मात्र 100 थी। इसके बाद साल 1997 में 136 वार्ड बनाए गए। इसके बाद साल 2007 में दिल्ली में 272 वार्ड बनाए गए। इस समय ईस्ट एमसीडी के पास 64 वार्ड है। उन्होंने कहा कि वार्डों का परिसीमन तीन बार हो चुका हैए लेकिन कर्मचारियों को तैनात करने वाले सिस्टम में कोई बदलाव नहीं हुआ। बैठक के दौरान नेता सदन प्रवेश शर्मा ने विपक्ष के नेता मनोज त्यागी के साथ एक कर्मचारी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार को लेकर मामला उठाया इस दौरान महापौर निर्मल जैन ने बताया कि उस कर्मचारी को निगमायुक्त ने निलंबित कर दिया है
रिटायर हो चुके लोक सेवकों से सरकारी आवास खाली कराएं रू दिल्ली हाईकोर्ट

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो ये सुनिश्चित करें कि लोक सेवक रिटायर होने के बाद सरकारी बंगलों में लंबे समय तक कब्जा नहीं जमाएंण् चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने आवास और शहरी विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वो अनाधिकृत रुप से कब्जा जमाए लोक सेवकों से बंगला खाली कराएं और अनाधिकृत रुप से रहने का जुर्माना भी वसूलेंण् सुनवाई के दौरान आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने रिटायर होने के बाद भी अनाधिकृत रुप से रह रहे 565 लोक सेवकों से सरकारी आवासों को खाली कराया हैण् उन लोक सेवकों से अनाधिकृत रुप से रहने के रुप में तीन करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला गया हैण् उनसे अभी नौ करोड़ रुपये वसूले जाना बाकी हैंण् आवास और शहरी विकास मंत्रालय की इस दलील के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दियाण् पिछले 5 फरवरी को हाईकोर्ट ने आवास और शहरी विकास मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वे 1998 से अनाधिकृत रुप से सरकारी बंगलों में रह रहे लोगों से 15 दिनों में बंगला खाली करने को कहेंण् हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वे 15 दिनों के अंदर बंगला खाली नहीं करते हैं तो उनका सामान सड़क पर डाल देंण् हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि अगर किसी बंगले को खाली करने पर किसी कोर्ट या ट्रिब्युनल की रोक है तो आवास और शहरी विकास मंत्रालय उन्हें खाली नहीं कराएगाण् दरअसल सरकारी बंगलों में पूर्व विधायकोंए पूर्व सांसदों और पूर्व नौकरशाहों द्वारा तय समय बीत जाने के बावजूद अनाधिकृत रुप से रहने के खिलाफ दो याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई थींण् याचिका एंटी करप्शन काउंसिल और चेन्नई फाइनेंस मार्केट एंड अकाउंटेबिलिटी ने दायर की थीण् याचिका में सरकारी बंगलों में अनाधिकृत रुप से रहने वाले लोगों पर होने वाले खर्च का ब्यौरा देने का दिशा.निर्देश जारी करने की मांग की गई थीण् सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील जेडयू खान ने कोर्ट से कहा था कि पूर्व नौकरशाहों ने करीब सौ सरकारी बंगलों में अनाधिकृत रुप से कब्जा जमा रखा हैण् कोर्ट को बताया गया था कि अनाधिकृत रुप से कब्जा करने की वजह से कई वर्तमान विधायक और सांसदों को सरकारी खर्च पर पांचसितारा होटलों में रखा जा रहा हैण् याचिकाकर्ता ने आरटीआई के जरिये सूचना मांगी थीण् लेकिन संबंधित विभाग ने कोई जानकारी नहीं दी थीण्

भारत विकास परिषद ने पीएम केयर्स फंड में 2ण्11 करोड़ रुपए का चंदा दिया रू सरकार

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । गैर.लाभकारी सामाजिक संगठन भारत विकास परिषद ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के जरिए पीएम केयर्स फंड में 2ण्11 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी है। सिंह ने इस चंदे को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों में काफी विश्वास और भरोसा है और यही कारण है कि जब भी वह किसी बात का आह्वान करते हैंए तो यह स्वाभाविक रूप से जन आंदोलन में बदल जाता है। उन्होंने इस क्रम में स्वच्छ भारत मिशनए शौचालय निर्माणए गैस सब्सिडी छोड़नेए कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर लॉकडाउन आदि का जिक्र किया। कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता ने पीएम केयर्स फंड नाम से एक विशेष कोष की स्थापना के लिए प्रेरित किया। उनके हवाले से बयान में कहा गया है कि कुछ समय के भीतर ही लोगों की प्रतिक्रिया काफी अच्छी रही और एक ओर परोपकारी और बड़े व्यापारिक घराने योगदान देने के लिए आगे आए वहीं दूसरी तरफ छोटे छोटे बच्चों ने अपनी बचत से योगदान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने सामाजिक संगठन के रूप में भारत विकास परिषद की सराहना की जिसने पिछले लगभग छह दशकों में प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ काम किया है। सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आयाए चाहे वह बाढ़ हो या सूखा होए युद्ध की स्थिति हो या प्राकृतिक आपदाए भारत विकास परिषद समाज की सेवा करने में सबसे आगे रहा है। भारत विकास परिषद का प्रतिनिधित्व उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष गजेंद्र सिंह संधूए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश बाबू गुप्ताए महासचिव सुरेश जैनए राष्ट्रीय महासचिव श्याम शर्माए राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष संपत खुर्दिया और राष्ट्रीय समन्वयक अजय दत्ता आदि ने किया।
पूर्व नौकरशाहों ने कृषि क्षेत्र के कानूनों के समर्थन में बयान जारी किया

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कृषि सुधार कानूनों का सोमवार को समर्थन किया और आरोप लगाया कि किसानों की मनोदशा पर नकारात्मक असर डालने के लिए मुद्दे पर ष्ष्दुष्प्रचारष्ष् किया जा रहा है। इन पूर्व नौकरशाहों ने दावा किया कि संसद द्वारा पारित विधेयकों ने देश के किसान समुदाय को शोषण वाली व्यवस्था से आजादी दी है। उन्होंने एक बयान में आरोप लगायाए ष्ष्आशंका करने की वजह है क्योंकि हमारे समाज में कुछ धड़े देश में दुष्प्रचार कर रहे हैं। हाल के समय में हमने देखा है कि असत्य और तोड़.मरोड़ कर बातों को रखे जाने से अल्पसंख्यकोंए छात्रों की मनोदशा पर बहुत ही नकारात्मक असर पड़ा और अब किसानों के साथ ऐसा किया जा रहा है।ष्ष् पूर्व नौकरशाहों के बयान में आरोप लगाया गया कि देश को अस्थिर करने और अल्पसंख्यकोंए छात्रों तथा किसानों के बीच असंतोष पैदा करने के लिए ष्ष्निहित हितष्ष् वाले लोगों के प्रयासों पर संदेह करने की वजह है। इस समूह में पूर्व वित्त सचिव एस नारायणए पूर्व बैंकिंग सचिव डी के मित्तलए पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमारए पूर्व पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा और पूर्व नागर विमानन सचिव के एन श्रीवास्तव समेत 32 पूर्व आईएएस अधिकारी शामिल हैं। परोक्ष तौर पर कांग्रेस का हवाला देते हुए पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि कुछ राजनीतिक दल जो अब इस कानून का विरोध कर रहे हैं उनके घोषणापत्र में भी बिचौलियों से किसानों को मुक्ति दिलाने और अपनी उपज को कहीं भी बेचने की आजादी दिलाने की बात कही गयी थी। पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि सरकार ने किसानों के जीवन में बदलाव के लिए महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं। इन कानूनों के जरिए देश के किसानों की प्रगति को धीमा करने वाले अवरोधों को खत्म किया गया है। पूर्व नौकरशाहों ने इन कानूनों के तहत किसानों को कहीं भी अपनी उपज बेचने और किसी के साथ भी अनुबंध करने की आजादी के प्रस्तावित फायदों का जिक्र करते हुए कहा है कि किसानों को ष्ष्भड़कानाष्ष् आपत्तिजनक है। बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य ;एमएसपीद्ध की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी। पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि किसानों को जहां भी दिक्कतें हो रही हैंए वह अपर्याप्त स्थानीय विपणन सुविधा के कारण होती है और इस कारण से बिचौलिए उनका ष्ष्शोषणष्ष् करते हैं। उन्होंने कहा है कि अगर भारत उनके लिए एक बाजार के तौर पर विकसित हो जाए और निजी क्षेत्र उनके उत्पादों की खरीद करे तो किसानों को कभी नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहाए ष्ष्सरकार द्वारा विभिन्न आर्थिक पैकेजों के साथ ही ऐतिहासिक कानूनों से निश्चित तौर पर किसान समुदायों का उत्थान होगा और वे समृद्ध होंगे। इन कानूनों से किसानों के लिए निष्पक्ष और मुक्त तंत्र का निर्माण होगा।ष्ष् पूर्व नौकरशाहों ने कहाए ष्ष्हमारा समूह किसानों को गुमराह करने और राष्ट्रीय पहल को बदनाम करने के निहित हितों के प्रयासों की निंदा करता है।ष्ष्

भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व निदेशकों के खिलाफ जांच से क्यों कतरा रही है सीबीआई रू अदालत

अंतिम प्रवक्ता नई दिल्ली 28 सितंबर । दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई के दो पूर्व निदेशकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कथित मामलों की जांच से ष्ष्कतराने के लिएष्ष् एजेंसी की खिंचाई की है और कहा है कि इससे ष्ष्यह निष्कर्ष निकाला जाएगा कि खुद से जुड़े मामलों की जांच करने को लेकर वह इच्छुक नहीं है।ष्ष् विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने मांस निर्यातक मोइन अख्तर कुरैशी एवं अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई करते हुए यह बात कही और जांच एजेंसी से कहा कि मामले में नई स्थिति रिपोर्ट दायर करे। मामले में कुरैशी के साथ सीबीआई के दो पूर्व निदेशकों .. ए पी सिंह और रणजीत सिन्हा की भूमिका जांच के दायरे में है। अदालत ने शनिवार को एजेंसी से कहा कि क्या सिन्हा के नाम की भी जांच की जा रही है और ष्ष्अगर ऐसा है तो क्या इस मामले में उनसे भी पूछताछ की गई है और अगर नहीं तो क्योंघ्ष्ष् न्यायाधीश ने कहाए ष्ष्सीबीआई ने संभावित संदिग्धों के यहां छापेमारीए हिरासत में लेकर पूछताछ जैसे आजमाये हुए तरीकों को अपनाकर इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंचायाघ्ष्ष् उन्होंने पूछाए ष्ष्क्या पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की भूमिका की भी जांच की गई कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर जांच रोक दी या जांच को तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचने दिया।ष्ष् अदालत ने सीबीआई से इन बिंदुओं पर उसे जानकारी देने को कहा। अदालत ने कहा कि ष्ष्इस मामले में सीबीआई के पूर्व निदेशक ए पी सिंहष्ष् की जांच क्यों नहीं की गई। अदालत ने पूछाए ष्ष्सीबीआई इस मामले में हाथ क्यों पीछे खींच रही है जिसमें उसके दो पूर्व निदेशकों की भूमिका है। इससे यह निष्कर्ष निकलेगा कि वह उनसे जुड़े मामलों की जांच नहीं करना चाहती।ष्ष् सीबीआई ने स्थिति रिपोर्ट दायर कर कहा था कि कोई निश्चित समय नहीं दिया जा सकता है। इस हलफनामे पर न्यायाधीश ने शनिवार को कहाए ष्ष्क्या इसका मतलब यह है कि जांच अनिश्चित समय तक चलेगा ताकि प्राथमिकी खुद ही खत्म हो जाए क्योंकि इस बारे में सभी सवालों के जवाब अस्पष्ट और टाल.मटोल वाले हैं।ष्ष्

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